Faridabad Borewell Accident : फरीदाबाद के सेक्टर-8 से दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां करीब 250 से 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरी तीन साल की बच्ची नेहा की जान नहीं बचाई जा सकी। सोमवार तड़के करीब 4 बजे लगभग 10 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्ची को बाहर निकाला गया। बाहर निकालते समय उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसे तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
खेलते समय अचानक खुले बोरवेल में गिरी नेहा
जानकारी के मुताबिक रविवार शाम नेहा अन्य बच्चों के साथ बोरवेल के आसपास खेल रही थी। इसी दौरान अचानक वह खुले बोरवेल में गिर गई। बच्ची के गिरते ही आसपास मौजूद बच्चों ने शोर मचाया। आवाज सुनकर स्थानीय लोग और बच्ची के पिता रामदीन मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन को घटना की सूचना दी गई।
मैनपुरी से आकर सीही गांव में रह रहा था परिवार
नेहा के पिता रामदीन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के रहने वाले हैं। वह कई वर्षों से अपने परिवार के साथ फरीदाबाद के सीही गांव में रहकर मजदूरी करते हैं। हादसे के वक्त रामदीन काम से लौट रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही वह मौके पर पहुंचे और बचाव दल के साथ बच्ची को निकालने की कोशिशों में जुटे रहे।
सूचना मिलते ही प्रशासन ने शुरू किया रेस्क्यू
बोरवेल में बच्ची के गिरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंच गईं। हरियाणा पुलिस, एसडीआरएफ, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने बचाव अभियान शुरू किया। इसके बाद गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम भी रात करीब 9 बजे घटनास्थल पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हुई।
गहराई और पानी के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण रहा
बचाव अभियान के दौरान टीम को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बताया गया कि बोरवेल कई वर्षों से इस्तेमाल में नहीं था और करीब 125 फीट की गहराई पर गंदा पानी मौजूद था। बच्ची काफी गहराई में फंसी थी और उसका सिर नीचे की ओर था। शुरुआती समय में उसके रोने की आवाज सुनाई दे रही थी, लेकिन बाद में आवाज आनी बंद हो गई।
उपकरणों के काम नहीं करने पर बनाया गया विशेष साधन
रेस्क्यू के दौरान प्रशासनिक उपकरणों से अपेक्षित मदद नहीं मिल पाई। इसके बाद स्थानीय स्तर पर एक कार पेंटर की सहायता से विशेष उपकरण तैयार किया गया। बचाव दल ने लगातार प्रयास जारी रखे और कई घंटों की मशक्कत के बाद सोमवार तड़के बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाल लिया। हालांकि तब तक उसकी हालत बेहद गंभीर थी।
अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित किया
बच्ची को बोरवेल से निकालने के तुरंत बाद निजी अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद नेहा को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम के जरिए मौत के कारणों की चिकित्सकीय पुष्टि की जाएगी।
15 साल पहले बंद किया गया था बोरवेल
नगर निगम के XEN संजीव कुमार के मुताबिक यह बोरवेल करीब 15 साल पहले ढक्कन लगाकर बंद किया गया था। निगम के अनुसार ढक्कन हटने की जानकारी विभाग को नहीं मिली थी। अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी
नेहा की मौत के बाद सेक्टर-8 के स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि बोरवेल को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से बंद किया गया होता तो ऐसी घटना को रोका जा सकता था। स्थानीय निवासियों ने इलाके में मौजूद खुले और लंबे समय से बंद बोरवेल की दोबारा जांच कराने तथा उन्हें सुरक्षित करने की मांग की है।
खुले बोरवेल की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने शहर में लंबे समय से बंद या खुले बोरवेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन ऐसे सभी स्थानों की पहचान कर उनकी नियमित जांच करे और खुले बोरवेल को स्थायी रूप से सुरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी बच्चे या अन्य व्यक्ति के साथ ऐसी दुर्घटना न हो।
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