CEC Powers Case: चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम रिट याचिका दाखिल की गई है। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका और आयोग की सामूहिक शक्तियों के कथित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अदालत का रुख किया है। मामले में सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह पैरवी करेंगे।
अनुच्छेद 324 और 2023 के कानून का हवाला
याचिका का मुख्य आधार संविधान का अनुच्छेद 324 और Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की धारा 18 है। याचिका में तर्क दिया गया है कि चुनावों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण की संवैधानिक शक्ति पूरे निर्वाचन आयोग में निहित है। याचिकाकर्ता का कहना है कि CEC आयोग के अध्यक्ष हैं, लेकिन अकेले CEC को ही पूरा चुनाव आयोग नहीं माना जा सकता।
आयोग में बहुमत से निर्णय का प्रावधान
याचिका में 2023 के कानून की धारा 18 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से होना चाहिए। यदि CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच किसी विषय पर मतभेद होता है तो कानून के अनुसार फैसला बहुमत की राय से किया जाना है। इस प्रावधान के आधार पर याचिका में आयोग के सामूहिक निर्णय की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच अलग-अलग मामलों में दर्ज की गई थीं। इनमें कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर दोनों आयुक्तों ने कथित तौर पर कहा कि वे उनकी जानकारी या स्वीकृति के बिना किए गए।
Form-6 में बदलाव पर उठे सवाल
याचिका में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलाव का भी उल्लेख है। याचिका के मुताबिक, मई 2026 में विवेक जोशी ने SIR से संबंधित नई जानकारी जोड़ने पर आपत्ति दर्ज की थी। उनका कथित तर्क था कि Registration of Electors Rules, 1960 में आवश्यक संशोधन के बिना वैधानिक फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया।
वोटर डेटाबेस और IT व्यवस्था पर चिंता
याचिका में चुनावी रोल के डिजिटल डेटाबेस और IT सिस्टम को लेकर उठाई गई आपत्तियों को भी आधार बनाया गया है। इसके मुताबिक, विवेक जोशी ने डेटाबेस तक पहुंच के क्रेडेंशियल्स के स्वतंत्र ऑडिट की आवश्यकता जताई थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने 29 जुलाई को IT व्यवस्था में वर्क अलोकेशन से जुड़े बदलाव को लेकर कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे थे।
पश्चिम बंगाल की अपीलों का भी जिक्र
याचिका में पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं से जुड़े मामलों में दाखिल कथित अपीलों को लेकर भी सवाल उठाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि कुछ अपीलें चुनाव आयोग के नाम से दाखिल की गईं। याचिका के अनुसार, 12 अगस्त को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने कथित तौर पर पूछा था कि इन अपीलों को दाखिल करने की अनुमति किसने दी और इसके लिए अधिकार किसके पास था।
मूल रिकॉर्ड की जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने कहा है कि केवल आपत्तियों के आधार पर किसी कार्रवाई को सीधे अवैध घोषित नहीं किया जाना चाहिए। याचिका में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है। इसमें बैठक के एजेंडे, मिनट्स, अप्रूवल शीट, फाइल नोटिंग और आदेशों जैसे दस्तावेजों को देखने की आवश्यकता बताई गई है।
Quo Warranto की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से Quo Warranto जारी करने की मांग भी की गई है। इसके जरिए CEC ज्ञानेश कुमार से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है कि वे कथित तौर पर आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल किस वैधानिक अधिकार के तहत कर रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि रिकॉर्ड से पता चलता है कि किसी निर्णय के लिए आवश्यक आयोगीय स्वीकृति नहीं थी, तो उसके कानूनी प्रभाव पर अदालत विचार करे।
हर आदेश के पीछे आयोगीय मंजूरी की मांग
याचिका में मांग की गई है कि अनुच्छेद 324 के तहत शक्तियों का प्रयोग बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के निर्णय के आधार पर हो। इसके साथ ही आयोग के नाम से जारी प्रत्येक आदेश, निर्देश, संचार या अपील के पीछे विधिवत दर्ज निर्णय और मंजूरी का रिकॉर्ड रखने की मांग की गई है।
चुनाव आयोग के हालिया फैसले भी महत्वपूर्ण
इस विवाद के बीच 26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने Form-6, चुनावी डेटाबेस और IT व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बैठक कर निर्णय लिए। यह बैठक दोनों आयुक्तों की पूर्व आपत्तियों से संबंधित रिपोर्टों के बाद हुई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे सुप्रीम कोर्ट में क्या सुनवाई होती है, यह महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगी गई राहत पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। वहीं, चुनाव आयोग ने हालिया सार्वजनिक स्पष्टीकरणों में कहा है कि आयोग के अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
Read More : Asian Games 2026 : ईशा सिंह ने शूटिंग में जीता सिल्वर, बराबर स्कोर के बाद शूटऑफ में फिसला गोल्ड