Mayawati on EVM : बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए देश में होने वाले आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की है। मायावती ने कहा कि हर नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अधिकार है और चुनाव व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि मतदाता जिस उम्मीदवार को वोट दे, उसका वोट उसी के खाते में दर्ज हो। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
मताधिकार की सुरक्षा पर जोर
मायावती ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं के मन में किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए। BSP प्रमुख ने कहा कि मतदान व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे लोगों को अपने वोट के सही तरीके से दर्ज होने को लेकर पूरा भरोसा रहे।
भाजपा के पुराने EVM विरोध का किया जिक्र
बसपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी के पुराने रुख का हवाला देते हुए कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, उस समय भाजपा ने भी EVM को लेकर आपत्तियां उठाई थीं। मायावती के अनुसार, उस दौर में भाजपा की ओर से EVM की इलेक्ट्रॉनिक प्रकृति और संभावित दुरुपयोग को लेकर सवाल किए जाते थे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विकसित देशों में बैलेट पेपर से चुनाव होने का मुद्दा भी उठाया था और अब वही पार्टी EVM के इस्तेमाल का समर्थन कर रही है।
कमजोर वर्ग के मतदाताओं में संदेह का दावा
मायावती ने कहा कि BSP का बड़ा जनाधार समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के बीच रहा है। उनके मुताबिक, EVM को लेकर उठ रहे सवालों की वजह से इन वर्गों के कई मतदाताओं के मन में अपने वोट को लेकर आशंका पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे सभी संदेहों को दूर करना आवश्यक है।
चंद्रशेखर आजाद की जीत पर भी टिप्पणी
मायावती ने नगीना लोकसभा सीट से आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की जीत का भी जिक्र किया और इसे लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद का उस क्षेत्र में पर्याप्त जनाधार नहीं था और आरोप लगाया कि EVM में कथित धांधली के जरिए उनकी जीत में मदद की गई। हालांकि, यह मायावती का आरोप है और इसके समर्थन में उन्होंने कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार चंद्रशेखर आजाद ने 2024 में नगीना सीट 1,51,473 वोटों के अंतर से जीती थी।
दलित मुद्दों पर चंद्रशेखर पर निशाना
बसपा प्रमुख ने चंद्रशेखर आजाद की राजनीतिक भूमिका पर भी टिप्पणी की। मायावती ने आरोप लगाया कि दलितों से जुड़े मामलों में चंद्रशेखर आजाद राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से पहुंचते हैं। यह मायावती की राजनीतिक टिप्पणी है। दूसरी ओर, चंद्रशेखर आजाद स्वयं भी चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। सितंबर 2026 में उन्होंने चुनाव आयोग में लोगों का भरोसा बनाए रखने की जरूरत पर बयान दिया था।
VVPAT व्यवस्था को लेकर भी सवाल
मायावती ने EVM के साथ इस्तेमाल होने वाली VVPAT व्यवस्था को भी पर्याप्त नहीं बताया। उन्होंने कहा कि VVPAT पर्चियों की शत-प्रतिशत गिनती या मिलान नहीं होने से मतदाताओं की आशंकाएं पूरी तरह दूर नहीं हो रही हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, VVPAT पर्ची पर उम्मीदवार का क्रमांक, नाम और चुनाव चिह्न करीब सात सेकंड तक दिखाई देता है, जिसके बाद पर्ची सीलबंद बॉक्स में चली जाती है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग
मायावती ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया के संबंध में पैदा हुई कथित असमंजस की स्थिति पर जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। देश के विभिन्न राज्यों में 2026 के SIR से जुड़े मतदाता रोल, दावे और आपत्तियों की प्रक्रियाएं चल रही हैं। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के आधिकारिक चुनावी पोर्टल पर SIR-2026 से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध हैं।
दिल्ली और पंजाब की कानून-व्यवस्था पर चिंता
अपने संबोधन में मायावती ने दिल्ली और पंजाब समेत कुछ राज्यों की कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर सरकारों को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। मायावती ने इसे देश की शांति और सुरक्षा से जुड़ा विषय बताते हुए संबंधित सरकारों से प्रभावी कदम उठाने की अपील की।
EVM विवाद पर जारी है राजनीतिक बहस
मायावती की मांग ऐसे समय सामने आई है जब EVM, VVPAT और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। चुनाव आयोग EVM और VVPAT की कार्यप्रणाली, सुरक्षा तथा सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराता है। आयोग के अनुसार मतदान से पहले EVM और VVPAT की जांच तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कई प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।
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