Sohrabuddin Encounter Case : साल 2005 के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें 22 आरोपियों को बरी किए जाने के विशेष सीबीआई अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया था। मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
सोहराबुद्दीन के भाई ने दायर की याचिका
यह याचिका सोहराबुद्दीन शेख के भाई रूबाबुद्दीन शेख की ओर से दायर की गई है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के 7 मई 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने विशेष सीबीआई अदालत के दिसंबर 2018 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के फैसले में 22 आरोपियों को बरी किए जाने के निर्णय को बरकरार रखा गया था।
CBI और 22 आरोपियों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI और हाईकोर्ट से बरी किए गए 22 आरोपियों को नोटिस जारी किया गया है। याचिका में हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा की मांग की गई है। अब अगली सुनवाई में संबंधित पक्ष अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर मामले और सुनवाई से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
26 नवंबर 2005 को हुई थी सोहराबुद्दीन की मौत
सोहराबुद्दीन शेख की 26 नवंबर 2005 को गुजरात में पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। इसके बाद उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत भी इसी मामले की जांच से जुड़ी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि सोहराबुद्दीन और अन्य लोगों को कथित तौर पर हिरासत में लेने के बाद उनकी मौत को मुठभेड़ का रूप दिया गया। हालांकि, ये अभियोजन के आरोप थे और अदालतों में इनके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य को लेकर सवाल उठे।
दिसंबर 2018 में 22 आरोपी हुए थे बरी
मामले की सुनवाई विशेष सीबीआई अदालत में हुई थी। दिसंबर 2018 में अदालत ने सबूतों के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। बाद में इस फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाइयों की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। मई 2026 में हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अपीलें खारिज कर दीं।
हाईकोर्ट ने सबूतों को लेकर क्या कहा था
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष कथित अपहरण, हिरासत और फर्जी एनकाउंटर की कहानी को पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर स्थापित नहीं कर सका। रिपोर्ट के मुताबिक, मुकदमे के दौरान 210 गवाहों से पूछताछ की गई थी, जिनमें 92 गवाह अपने पहले के कथित बयानों से मुकर गए थे। हाईकोर्ट ने इन्हीं परिस्थितियों समेत अभियोजन के साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया एक और चरण में पहुंच गई है। हालांकि, नोटिस जारी होना किसी आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध होने का संकेत नहीं है। अब अदालत याचिकाकर्ता, CBI और 22 आरोपियों के पक्षों पर विचार करेगी। 28 अक्टूबर की सुनवाई में आगे की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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