TMC Name-Symbol Row :’ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस यानी AITC के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को समय-सीमा तय कर दी। अदालत ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अपनी दलीलें, जवाब और जरूरी दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद निर्वाचन आयोग को विवाद पर अंतिम फैसला लेने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए प्रभावी रूप से चार महीने की समयसीमा तय हुई है।
ममता और ऋतब्रत बनर्जी गुटों के बीच है विवाद
यह मामला AITC के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर है। विवाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट के दावों से जुड़ा है। निर्वाचन आयोग ने पहले दोनों पक्षों के दावों को देखते हुए कहा था कि मामले का विस्तृत निपटारा Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत किया जाना है।
दोनों गुटों को चार सप्ताह में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष निर्वाचन आयोग के सामने चार सप्ताह के भीतर अपनी प्लीडिंग पूरी करें। इसमें एफिडेविट, काउंटर-एफिडेविट, जवाब, दस्तावेज और अपने दावों के समर्थन में आवश्यक सामग्री शामिल होगी। अदालत के अनुसार, दोनों पक्षों की लिखित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन आयोग अंतिम सुनवाई और निर्णय की दिशा में आगे बढ़ेगा।
निर्वाचन आयोग को तीन महीने में देना होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को दोनों पक्षों की प्लीडिंग पूरी होने के बाद तीन महीने के भीतर विवाद का निर्णय करने का निर्देश दिया है। इसका अर्थ है कि चार सप्ताह की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग के पास अंतिम निर्णय के लिए तीन महीने होंगे। इस तरह अदालत ने मामले को अनिश्चित समय तक लंबित रहने से रोकने के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है।
17 सितंबर के अंतरिम आदेश को ममता ने दी थी चुनौती
ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के 17 सितंबर 2026 के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। आयोग ने आगामी उपचुनावों को देखते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को AITC का मूल नाम और ‘फूल और घास’ चिन्ह इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग ने यह व्यवस्था अंतिम निर्णय होने तक अंतरिम तौर पर लागू की थी।
दोनों गुटों को दिए गए अलग नाम और चुनाव चिन्ह
निर्वाचन आयोग के अंतरिम प्रबंध के तहत ममता बनर्जी के गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Football Player’ चुनाव चिन्ह दिया गया। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए की गई थी और इसे AITC के वास्तविक नियंत्रण पर अंतिम फैसला नहीं माना गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी आयोग से मांगी थी समय-सीमा
इस मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से पूछा था कि वह AITC के नाम और चुनाव चिन्ह विवाद का अंतिम निपटारा कितने समय में कर सकता है। अदालत ने मामले में अनावश्यक देरी से बचने पर जोर दिया था। 24 सितंबर को कोर्ट ने आयोग से उचित समय-सीमा बताने को कहा था और शिवसेना के लंबे चले विवाद का उदाहरण देते हुए जल्द निर्णय की आवश्यकता पर टिप्पणी की थी।
चुनाव चिन्ह विवाद पैरा 15 के तहत लंबित
AITC के नाम और चुनाव चिन्ह का मूल विवाद निर्वाचन Symbols Order, 1968 के पैरा 15 के तहत निर्वाचन आयोग के समक्ष लंबित है। यह प्रावधान किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल में विभाजन या प्रतिद्वंद्वी दावों की स्थिति में पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े दावे पर निर्णय लेने की प्रक्रिया से संबंधित है। आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में भी स्पष्ट किया था कि वास्तविक अधिकार का फैसला अभी बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में तीन न्यायाधीश शामिल
ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने समय-सीमा तय करते हुए यह स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दे रही है और दोनों पक्ष अपने सभी दावे निर्वाचन आयोग के समक्ष रख सकते हैं।
अब निर्वाचन आयोग के फैसले पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद AITC के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम फैसला अब निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। दोनों गुटों को पहले चार सप्ताह में अपनी दलीलें और दस्तावेज पूरे करने होंगे। इसके बाद आयोग को तीन महीने के भीतर मामले का निपटारा करना होगा। अदालत की तय समय-सीमा के कारण अब इस लंबे विवाद में अगले चरणों की समयरेखा स्पष्ट हो गई है।
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