CBSE 3 Language Policy : CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कक्षा 6 में पढ़ रहे छात्रों को बड़ी राहत दी। अदालत ने निर्देश दिया कि मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को वही छूट दी जाए, जो वर्तमान कक्षा 7 के छात्रों को मिली हुई है। इसका मतलब है कि इस साल कक्षा 6 के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन उसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा से भी राहत
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का असर छात्रों की आगे की पढ़ाई पर भी पड़ेगा। मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को कक्षा 10 में तीसरी भाषा के लिए CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। तीसरी भाषा का आकलन स्कूल स्तर पर ही किया जाएगा। CBSE ने पहले ही तीसरी भाषा के लिए कक्षा 10 में बोर्ड परीक्षा नहीं कराने की व्यवस्था स्पष्ट की थी।
2027 से लागू होगी नई व्यवस्था
अदालत के निर्देश के बाद तीन भाषा नीति की नई व्यवस्था मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों पर तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगी। अगले शैक्षणिक सत्र से नई व्यवस्था लागू करने की दिशा तय हुई है। रिपोर्टों के अनुसार 1 अप्रैल 2027 से कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर तीन भाषा फार्मूला लागू होगा।
छात्रों पर अतिरिक्त दबाव को लेकर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी तीन भाषा नीति लागू करने के तरीके पर चिंता जताई थी। 20 अगस्त की सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि नई व्यवस्था के कारण बच्चों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए। अदालत ने शिक्षकों और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी ध्यान दिया था।
केंद्र ने स्कूलों में व्यवस्था का दिया हवाला
28 सितंबर की सुनवाई में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों में तीसरी भाषा पढ़ाने की व्यवस्था हो चुकी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBSE से जुड़े स्कूलों की बड़ी संख्या को देखते हुए एक प्रतिशत स्कूल भी छोटी संख्या नहीं है। इसके बाद मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने का निर्देश दिया गया।
तीन भाषाओं में क्या पढ़ना होगा
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। CBSE ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 और नए पाठ्यक्रम ढांचे के अनुरूप लागू करने की योजना बनाई है। अंग्रेजी को लेकर भी अदालत में चर्चा हुई है कि उसे भारतीय या विदेशी भाषा की श्रेणी में किस तरह माना जाए।
किताबों और शिक्षकों की उपलब्धता पर सवाल
तीन भाषा नीति के खिलाफ दायर याचिकाओं में छात्रों और अभिभावकों की ओर से व्यावहारिक परेशानियों का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कई स्कूलों में नई भाषाओं के लिए पर्याप्त शिक्षक और पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले सुनवाई के दौरान कहा था कि अतिरिक्त भाषा शुरू करने से पहले जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।
कक्षा 7 और 8 की व्यवस्था क्या है
CBSE की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार कुछ छात्रों को तीसरी भाषा के मूल्यांकन में विशेष राहत दी गई है। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाता है और इसके लिए कक्षा 10 में अलग CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश के बाद इसी प्रकार की व्यवस्था मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों पर भी लागू होगी।
कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए नियम
CBSE के अनुसार तीसरी भाषा यानी R3 के लिए कक्षा 9 में आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था है। यदि कोई छात्र इस मूल्यांकन में सफल नहीं होता है, तो उसे आगे सुधार का अवसर दिया जा सकता है। तीसरी भाषा को लेकर बोर्ड परीक्षा से अलग स्कूल-स्तरीय मूल्यांकन व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का अतिरिक्त दबाव कम करना है।
अभिभावकों और छात्रों को क्या समझना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को तत्काल राहत मिली है। उन्हें तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन मौजूदा संक्रमणकालीन व्यवस्था के तहत इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा। वहीं 2027-28 से कक्षा 6 में आने वाले नए बैच के लिए तीन भाषा नीति निर्धारित नियमों के अनुसार लागू होगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट आगे भी व्यापक मुद्दों पर सुनवाई करेगा।
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