Russia Ukraine War : रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब यूक्रेन से सटे पोलैंड के सीमावर्ती इलाकों में ज्यादा महसूस किया जा रहा है। पूर्वी पोलैंड के डोरोहुस्क गांव में गुरुवार को नागरिकों के मोबाइल फोन पर एक ही दिन में तीन बार सुरक्षा अलर्ट जारी हुए। इन संदेशों में संभावित ड्रोन या मिसाइल खतरे को लेकर लोगों को सतर्क किया गया और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई।
सीमा चौकी पर तीन बार रोका गया यातायात
यूक्रेन की सीमा से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित डोरोहुस्क में गुरुवार को आसमान में विमानों और हेलीकॉप्टरों की गतिविधियां देखी गईं। इसी दौरान डोरोहुस्क-याहोदीन सीमा चौकी पर यातायात को तीन अलग-अलग मौकों पर रोकना पड़ा। एक घटना के दौरान सीमा चौकी के कर्मचारियों को भी एहतियातन सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। ये घटनाएं उस समय हुईं, जब एसोसिएटेड प्रेस की टीम गांव में मौजूद थी।
युद्ध की आहट अब सीमा के करीब
स्थानीय लोगों के लिए लगातार मिल रहे अलर्ट और सीमा पर बढ़ती सुरक्षा गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि करीब साढ़े चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव अब पोलैंड की सीमा तक अधिक प्रत्यक्ष रूप से महसूस किया जा रहा है। डोरोहुस्क के निवासियों ने युद्ध शुरू होने के बाद से सुरक्षा को लेकर चिंता का सामना किया है। शुरुआत में बड़ी संख्या में यूक्रेनी शरणार्थी इसी सीमा के रास्ते पोलैंड पहुंचे थे।
सितंबर में ड्रोन विस्फोट से बढ़ा डर
डोरोहुस्क के मेयर वोइचेक सावा के अनुसार, 13 सितंबर की सुबह सीमा चौकी के यूक्रेनी हिस्से में दो रूसी ड्रोन विस्फोट हुए थे। इन धमाकों की आवाज पोलैंड के डोरोहुस्क गांव तक भी सुनाई दी। मेयर ने बताया कि इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में पहले की तुलना में ज्यादा बेचैनी पैदा हुई। उन्होंने कहा कि गांव में इतनी तेज आवाज वाले सायरन पहले कभी नहीं सुने गए थे।
जुलाई की मिसाइल घटना ने भी बढ़ाई चिंता
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, जुलाई में भी एक रूसी मिसाइल पोलैंड के हवाई क्षेत्र से गुजरने के बाद देश के अंदर करीब 90 किलोमीटर दूर जाकर गिरी थी। ऐसी घटनाओं ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है। हालांकि हर घटना सीधे पोलैंड को निशाना बनाए जाने का संकेत नहीं देती, लेकिन सीमा के नजदीक रहने वाले लोगों के लिए ऐसी गतिविधियां चिंता का कारण बनी हुई हैं।
रूस के हाइब्रिड हमलों को लेकर चेतावनी
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 17 सितंबर को चेतावनी दी थी कि रूस यूक्रेन का समर्थन करने वाले यूरोपीय देशों के खिलाफ ड्रोन और रॉकेट समेत विभिन्न माध्यमों से हाइब्रिड गतिविधियां बढ़ा सकता है। उनके अनुसार, यूक्रेन से लगते पोलैंड के सीमावर्ती इलाके आने वाले महीनों में विशेष रूप से संवेदनशील हो सकते हैं। यूरोप के कुछ नेताओं और खुफिया एजेंसियों ने भी साइबर हमलों, तोड़फोड़ और दुष्प्रचार जैसी गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है।
स्कूलों में बच्चों को सुरक्षा प्रशिक्षण
डोरोहुस्क के स्कूल में भी संभावित हवाई खतरे से निपटने की तैयारी की जा रही है। स्कूल निदेशक जारोस्लाव वोजचित्स्की के मुताबिक, शिक्षक और मनोवैज्ञानिक छात्रों से नियमित रूप से सुरक्षा उपायों पर चर्चा करते हैं। स्कूल को अब तक एक बार खाली भी कराया जा चुका है। उस दौरान बच्चों को बेसमेंट के दो कमरों में सुरक्षित स्थान दिया गया था। कुछ खिड़कियों को भी बंद किया गया है ताकि संभावित विस्फोट की स्थिति में कांच से चोट का खतरा कम किया जा सके।
सीमा पर नई एयर डिफेंस व्यवस्था
पोलैंड के रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिश ने 22 सितंबर को डोरोहुस्क-याहोदीन सीमा चौकी का दौरा किया। उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्र में नई एयर डिफेंस व्यवस्थाएं स्थापित की जा रही हैं। मंत्री के अनुसार, यूक्रेन से लगते पोलैंड के दो क्षेत्रों में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य संभावित हवाई खतरों के खिलाफ सुरक्षा क्षमता मजबूत करना है।
नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि पोलैंड में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को अभी और मजबूत करने की आवश्यकता है। ल्यूब्लिन के अधिकारी मिरोस्लाव सोकाल ने बताया कि आम नागरिकों को संभावित खतरों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। उनके अनुसार, हवाई खतरे की स्थिति में लोगों को इमारत के अंदर जाना चाहिए और खिड़कियों से पर्याप्त दूरी बनाए रखनी चाहिए।
बार-बार अलर्ट से लोगों में असमंजस
डोरोहुस्क के कुछ निवासियों का कहना है कि लगातार जारी होने वाले सुरक्षा अलर्ट कभी-कभी भ्रम की स्थिति भी पैदा करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि खतरा सीधे गांव पर हो तो प्रतिक्रिया देना समझ में आता है, लेकिन यूक्रेन में सामान्य हवाई हमले के अलर्ट के दौरान यह स्पष्ट नहीं होता कि उन्हें किस सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। ऐसे में प्रशासन के सामने नागरिकों को स्पष्ट और प्रभावी सुरक्षा निर्देश देने की चुनौती बनी हुई है।
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