Trump Iran Deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ संभावित अंतिम समझौते के लिए कुछ आर्थिक रियायतों पर विचार कर सकते हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर ठोस प्रगति दिखाता है, तो अमेरिका ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत देने और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसे कदमों पर विचार कर सकता है।
मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी
अमेरिकी अधिकारी ने CNN से बातचीत में बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत चल रही है। हालांकि, अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि परमाणु मुद्दे का समाधान किए बिना किसी अंतिम समझौते तक पहुंचना मुश्किल होगा। ऐसे समय में यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
परमाणु कार्यक्रम पर ठोस प्रगति जरूरी
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि किसी संभावित समझौते के लिए ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट और ठोस प्रतिबद्धता दिखानी होगी। बातचीत में प्रतिबंधों में संभावित राहत और फ्रीज संपत्तियों से जुड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं, लेकिन इन रियायतों को परमाणु मुद्दे पर प्रगति से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति बाकी है।
होर्मुज को लेकर ट्रंप ने प्रस्ताव ठुकराया
इस बीच, ट्रंप ने शनिवार को ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से जुड़े प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने योग्य नहीं माना। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
इस सप्ताह फिर बातचीत की उम्मीद
रविवार को ट्रंप ने Axios से बातचीत में कहा था कि उन्हें इस सप्ताह ईरान के साथ फिर बातचीत होने की उम्मीद है। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, बातचीत में अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। मध्यस्थों के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।
ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप की आपत्ति
ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव पर कहा कि तेहरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उसकी ओर से रखी गई शर्तें अमेरिका की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं। ट्रंप के अनुसार, संभव है कि अमेरिका करीब एक साल पहले ऐसी शर्तों पर सहमत होने पर विचार करता, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ईरान की मांगें आगे बढ़ चुकी हैं। उन्होंने इसी आधार पर प्रस्ताव को अस्वीकार किया।
परमाणु मुद्दे पर ईरान ने दिखाई नरमी
अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह परमाणु मुद्दे पर अपने रुख में कुछ लचीलापन दिखाने को तैयार है। हालांकि, अभी दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो पाए हैं कि प्रस्तावित प्रतिबद्धताओं को किस समय और किस तरीके से लागू किया जाएगा। यही अंतर बातचीत में सबसे महत्वपूर्ण लंबित मुद्दों में से एक बना हुआ है।
अमेरिका को ईरान की नीयत पर संदेह
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने CNN से बातचीत में कहा कि ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को इसलिए खारिज किया क्योंकि अमेरिकी पक्ष को तेहरान की बातचीत के प्रति गंभीरता और ईमानदारी को लेकर भरोसा नहीं था। वॉल्ट्ज के मुताबिक, अमेरिका को यह स्वीकार्य नहीं था कि बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान कई रियायतों की मांग रखे।
प्रतिबंधों में राहत का रास्ता शर्तों से जुड़ा
मौजूदा स्थिति में अमेरिका की ओर से संभावित आर्थिक राहत को सीधे परमाणु मुद्दे पर प्रगति से जोड़ा जा रहा है। यदि दोनों पक्ष प्रतिबद्धताओं, समयसीमा और उनके क्रियान्वयन के तरीके पर सहमति बना लेते हैं, तो आगे समझौते की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं। फिलहाल बातचीत जारी है और किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
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