भारतीय कारोबारी समूह Essar Group अमेरिका में करीब 18 अरब डॉलर यानी लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश से बड़ा स्टील प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। समूह की अमेरिकी कंपनी Mesabi Metallics इस परियोजना को आयोवा में विकसित करेगी। प्रस्तावित प्लांट की सालाना स्टील उत्पादन क्षमता करीब 1 करोड़ टन बताई गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े स्टील प्लांट के रूप में बताया है।
निवेश को लेकर अलग-अलग आंकड़े
इस मेगा प्रोजेक्ट के निवेश को लेकर अमेरिकी प्रशासन और कंपनी की ओर से अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लूटनिक ने खान और स्टील प्लांट को मिलाकर निवेश करीब 17.5 अरब डॉलर बताया। वहीं, परियोजना के मालिकों के अनुसार कुल निवेश लगभग 18 अरब डॉलर होगा। इस परियोजना में स्टील उत्पादन के साथ लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा।
हजारों लोगों को रोजगार मिलने का दावा
व्हाइट हाउस में परियोजना की घोषणा करते हुए ट्रंप ने इससे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने की बात कही। उनके मुताबिक, निर्माण चरण में करीब 6,000 कंस्ट्रक्शन जॉब्स पैदा हो सकते हैं। प्लांट के संचालन के बाद लगभग 2,000 स्थायी मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां बनने का अनुमान है। इसके अलावा खनन क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।
आयोवा में बनेगा स्टील प्लांट
Mesabi Metallics का प्रस्तावित स्टील प्लांट आयोवा में विकसित किया जाएगा। कंपनी यहां आधुनिक तकनीक के जरिए बड़े पैमाने पर स्टील उत्पादन की तैयारी कर रही है। परियोजना की अनुमानित क्षमता लगभग 1 करोड़ टन सालाना होगी। ट्रंप ने इसे अमेरिका के सबसे बड़े स्टील प्लांटों में शामिल होने वाली परियोजना बताया है। इससे अमेरिकी स्टील उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की योजना जुड़ी हुई है।
मिनेसोटा की खान से आएगा लौह अयस्क
Essar Group की योजना इस परियोजना को एकीकृत सप्लाई चेन के रूप में विकसित करने की है। इसके तहत स्टील प्लांट के लिए जरूरी लौह अयस्क पड़ोसी राज्य मिनेसोटा में विकसित की जा रही नई खदान से उपलब्ध कराया जाएगा। वहां से निकाले गए लौह अयस्क को आयोवा स्थित प्लांट तक पहुंचाया जाएगा, जहां इसका इस्तेमाल स्टील उत्पादन में किया जाएगा।
खान में 3 अरब डॉलर का निवेश
Essar Group के चेयरमैन रेवंत रुइया के मुताबिक, समूह मिनेसोटा की लौह अयस्क खदान में करीब 3 अरब डॉलर का निवेश करेगा। कंपनी का कहना है कि यह खदान अमेरिका में पांच दशक से ज्यादा समय में विकसित होने वाली पहली नई आयरन ओर माइन में से एक हो सकती है। इससे परियोजना के माइनिंग हिस्से को भी महत्वपूर्ण विस्तार मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका में ही पूरी होगी सप्लाई चेन
ट्रंप ने परियोजना की घोषणा के दौरान इस बात पर जोर दिया कि लौह अयस्क के खनन से लेकर स्टील तैयार करने तक की प्रक्रिया अमेरिका के भीतर होगी। इससे कंपनी को घरेलू स्तर पर कच्चे माल की आपूर्ति और स्टील उत्पादन की एकीकृत व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल सकती है। प्रस्तावित मॉडल में माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग दोनों को एक ही सप्लाई चेन से जोड़ा जाएगा।
2030 के आसपास शुरू हो सकता है उत्पादन
यह परियोजना लंबी अवधि की योजना है और इसके पूरी तरह विकसित होने में करीब 10 साल तक लग सकते हैं। कंपनी का लक्ष्य लगभग 2030 के आसपास स्टील उत्पादन शुरू करना बताया गया है। प्लांट में एडवांस्ड स्टील मेकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। उत्पादन शुरू होने के बाद तैयार स्टील का उपयोग अमेरिकी बाजार में होने के साथ दूसरे देशों में निर्यात भी किया जा सकता है।
प्राइवेट फंडिंग से तैयार होगा प्लांट
Essar Group के अनुसार, स्टील प्लांट को पूरी तरह निजी फंडिंग से विकसित किया जाएगा। हालांकि, मिनेसोटा स्थित लौह अयस्क खदान के वित्तपोषण में अमेरिकी Export-Import Bank की सहायता भी शामिल है। इस परियोजना के जरिए Essar Group अमेरिका में माइनिंग से लेकर स्टील उत्पादन तक अपनी औद्योगिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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