Rahul Gandhi Women Safety : कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिलाओं की सुरक्षा और पितृसत्तात्मक सोच को लेकर सरकार और समाज से गंभीर सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपराध और उत्पीड़न से बचाने के नाम पर उनकी आवाजाही सीमित करना या उन्हें घर में बंद रखना समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, महिलाओं के लिए सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य जगहों को सुरक्षित बनाना जरूरी है। साथ ही अपराधियों के खिलाफ तेजी से और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
जमुई मामले का राहुल गांधी ने किया जिक्र
राहुल गांधी ने हाल के दिनों में बिहार के जमुई में सामने आए एक मामले का भी उल्लेख किया। 21 सितंबर को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो को लेकर प्रतिक्रिया दी थी। वीडियो में 10वीं कक्षा के छात्र और छात्रा को कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा सड़क पर रोके जाने और लड़की के साथ बदसलूकी किए जाने की बात सामने आई थी। राहुल गांधी ने घटना को परेशान करने वाला बताते हुए आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
पितृसत्ता को लेकर उठाया सवाल
जमुई की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि किसी लड़की के शरीर, उसकी आवाजाही और उसकी पसंद पर किसी पुरुष को नियंत्रण करने का अधिकार आखिर किसने दिया। उन्होंने ऐसी सोच को पितृसत्तात्मक मानसिकता से जोड़ते हुए आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ POCSO कानून के तहत कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों और कानूनी कार्रवाई को संबंधित जांच एवं आधिकारिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
दिल्ली की घटना का भी किया उल्लेख
राहुल गांधी ने दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से जुड़े कथित सामूहिक यौन हिंसा के मामले के बाद उठे महिला सुरक्षा के सवालों का भी जिक्र किया। पुलिस के अनुसार, लड़की ने आरोप लगाया था कि तीन लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उसके साथ मारपीट और यौन हिंसा की। मामले की जांच जारी है। घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।
छात्रों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों ने सार्वजनिक जगहों पर पर्याप्त रोशनी, सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। 28 सितंबर को भी बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांगों में महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और ऐसी व्यवस्था शामिल रही, जिसमें किसी घटना के बाद शिकायत और कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावी तरीके से आगे बढ़ सके।
घर में बंद करना समाधान नहीं
राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि महिलाओं को सड़कों पर निकलने से रोकना या उन्हें घर में रहने की सलाह देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उनका कहना है कि असली चुनौती सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने की है। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाली मानसिकता का विरोध करने के साथ अपराधियों के खिलाफ कानून के मुताबिक समय पर कार्रवाई आवश्यक है।
पीड़ित को जिम्मेदार ठहराने पर सवाल
राहुल गांधी ने पितृसत्ता की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था में कई बार अपराध के लिए पीड़ित महिला को ही जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। उनके अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी स्वतंत्रता सीमित करने के बजाय अपराध करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। यह राहुल गांधी का राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण है, जिसे उनके सार्वजनिक बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
Gen Z से शांतिपूर्ण आवाज उठाने की अपील
राहुल गांधी ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सड़कों पर आवाज उठा रहे छात्रों और युवाओं का समर्थन भी किया। उन्होंने युवा महिलाओं और देशभर की Gen Z से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। उनका संदेश सार्वजनिक सुरक्षा, महिलाओं की स्वतंत्रता और अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के मुद्दों पर केंद्रित रहा। दिल्ली के छात्र प्रदर्शनों में भी सुरक्षित सड़कें, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही जैसे विषय प्रमुख रहे।
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