Houthi Attack : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा है कि अगर सऊदी अरब पर हमला होता है तो पाकिस्तान उसके साथ खड़ा रहेगा और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ रहा है।
‘सऊदी का दुश्मन पाकिस्तान का दुश्मन’
रोम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब का कोई भी दुश्मन पाकिस्तान के लिए भी दुश्मन माना जाएगा। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि तीनों देशों ने सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस समझौते के मुताबिक किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा।
क्या पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरेगा?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पाकिस्तानी सेना ने यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ हालिया हवाई हमलों में हिस्सा लिया है या नहीं। उन्होंने सैन्य अभियानों से जुड़े परिचालन विवरण पर टिप्पणी करने से परहेज किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी पहले कहा था कि समझौते के तहत कब, कहां और किस तरह की सैन्य कार्रवाई की जाएगी, इससे जुड़े कुछ विवरण गोपनीय रखे जाएंगे।
अगस्त में हुआ था मक्का संयुक्त रक्षा समझौता
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सामूहिक प्रतिरोध क्षमता और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। आधिकारिक संयुक्त बयान के अनुसार, किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, समझौते का पूरा परिचालन ढांचा और सैन्य प्रतिक्रिया की विस्तृत प्रक्रिया अभी सार्वजनिक नहीं है।
हूती हमलों से सऊदी और समुद्री मार्गों पर बढ़ा दबाव
यमन के हूती विद्रोहियों की हालिया गतिविधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है। रिपोर्टों के अनुसार, हूतियों ने लाल सागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियां तेज की हैं और सऊदी अरब से जुड़े ठिकानों तथा समुद्री मार्गों को निशाना बनाया है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
रियाद में तीनों देशों के सैन्य प्रमुखों की बैठक
बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के सैन्य प्रमुखों ने रियाद में बैठक की। इसमें खुफिया जानकारी साझा करने, सैन्य समन्वय और रक्षा क्षमताओं को एक-दूसरे के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने पर चर्चा हुई। बैठक में हूती हमलों से उत्पन्न क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार किया गया।
पाकिस्तान के ईरान के साथ रिश्ते भी बने हुए हैं
हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त होने के आरोपों के बीच पाकिस्तान ने तेहरान के साथ अपने राजनयिक संबंध बनाए रखने की बात कही है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि कुछ सशस्त्र समूह अपने स्तर पर भी फैसले लेते हैं। साथ ही इस्लामाबाद मध्य पूर्व में तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की वकालत कर रहा है।
सैन्य कार्रवाई पर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं
ख्वाजा आसिफ के बयान के बाद पाकिस्तान की संभावित सैन्य भूमिका को लेकर चर्चा तेज हुई है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तानी सेना हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध अभियान में शामिल हो चुकी है। फिलहाल इस्लामाबाद ने सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जबकि मक्का समझौते के वास्तविक सैन्य इस्तेमाल और उसकी प्रक्रिया को लेकर कई विवरण अभी स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
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