CG Agriculture : नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में देशभर के राज्यों की कृषि प्राथमिकताओं और आगामी रबी सीजन की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। छत्तीसगढ़ की ओर से कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने हिस्सा लिया और राज्य में कृषि विकास तथा किसानों से संबंधित योजनाओं को लेकर अपनी प्राथमिकताएं रखीं।
छत्तीसगढ़ के लिए 181 करोड़ रुपये की मंजूरी
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी PM-RKVY के तहत छत्तीसगढ़ के लिए करीब 181 करोड़ रुपये के स्वीकृति पत्र का वितरण किया गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत यह राशि राज्य में कृषि क्षेत्र से संबंधित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में इस्तेमाल की जाएगी। इससे राज्य में कृषि गतिविधियों और किसानों से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
समय पर संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों में कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया। सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने को महत्वपूर्ण बताया गया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य कृषि योजनाओं का लाभ किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना और योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करना रहा।
रबी अभियान 2026 की तैयारियों पर चर्चा
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में रबी अभियान 2026 की तैयारियों को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इसमें मौसम के पूर्वानुमान, खाद की उपलब्धता, किसानों की तैयारी, डिजिटल कृषि व्यवस्था, किसान रजिस्ट्री और फसल आधारित योजनाओं जैसे विषय शामिल रहे। राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पहले से तैयारी करने और किसानों को जरूरी जानकारी तथा संसाधन समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
दलहन और तिलहन का रकबा बढ़ाने की रणनीति
बैठक में दलहन और तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने तथा कृषि में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। केंद्र की ओर से राज्यों को मिट्टी और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर फसल योजना तैयार करने की सलाह दी गई। खास तौर पर धान की खेती के बाद खाली रहने वाले खेतों में कम पानी की आवश्यकता वाली दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा हुई।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने की रणनीति के पीछे कृषि क्षेत्र में विविधता लाने के साथ किसानों की आय को मजबूत करने का उद्देश्य भी बताया गया। राज्यों को ऐसी फसलों को प्रोत्साहित करने पर विचार करने को कहा गया, जिनके लिए स्थानीय जलवायु और मिट्टी अनुकूल हो। इससे उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करने और किसानों को अतिरिक्त फसल विकल्प उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
कृषि योजनाओं की निगरानी पर जोर
सम्मेलन में केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन और निगरानी पर भी जोर दिया गया। विकसित कृषि संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति की निगरानी करने और उनके लाभ को वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचाने की दिशा में काम करने पर बल दिया गया।
छत्तीसगढ़ में कृषि योजनाओं को मिलेगी गति
छत्तीसगढ़ के लिए PM-RKVY के तहत स्वीकृत 181 करोड़ रुपये से राज्य में कृषि क्षेत्र से संबंधित योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे। सम्मेलन में राज्य की कृषि प्राथमिकताओं और किसानों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। केंद्र और राज्य के बीच समन्वय के जरिए रबी फसल की तैयारी, फसल विविधीकरण और कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने पर जोर रहा।
केंद्र-राज्य समन्वय को बताया गया महत्वपूर्ण
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में सामने आए विषयों से स्पष्ट है कि आगामी रबी सीजन के लिए राज्यों को मौसम, खाद, तकनीक और फसल योजना से जुड़ी तैयारियों पर विशेष ध्यान देना होगा। छत्तीसगढ़ के लिए स्वीकृत राशि और सम्मेलन में हुई चर्चाओं के जरिए राज्य में कृषि योजनाओं को गति देने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव उनके जमीनी क्रियान्वयन और किसानों तक लाभ पहुंचने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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