Shardiya Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ कलश स्थापना या घटस्थापना करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना को विशेष महत्व दिया जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का आरंभ होता है। मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा के साथ घटस्थापना करने से देवी आराधना का शुभ संकल्प किया जाता है। हालांकि, पूजा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
कलश को माना जाता है शुभता और समृद्धि का प्रतीक
धार्मिक परंपराओं में कलश को पवित्रता, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। कई मान्यताओं में कलश का संबंध त्रिदेवों और तीर्थों से जोड़ा जाता है। नवरात्रि में इसकी स्थापना देवी शक्ति के आह्वान के उद्देश्य से की जाती है। पूजा स्थल पर कलश स्थापित करने से पहले स्थान की अच्छी तरह सफाई और शुद्धिकरण किया जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, पवित्र वातावरण में पूजा करने से सकारात्मकता बनी रहती है।
कलश स्थापना में दिशा का रखें विशेष ध्यान
कलश स्थापना के लिए पूजा स्थान का चयन महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर में घटस्थापना के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में कलश रखने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा के लिए स्थान साफ, शांत और पवित्र होना चाहिए। जौ बोने के लिए भी स्वच्छ मिट्टी का इस्तेमाल करना चाहिए और अशुद्ध या गंदी मिट्टी से बचना चाहिए।
कलश के लिए धातु और सामग्री का सही चुनाव करें
कलश स्थापना में तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश का इस्तेमाल करने की परंपरा है। धार्मिक पूजा में लोहे, प्लास्टिक या अन्य अनुपयुक्त बर्तनों का प्रयोग न करने की सलाह दी जाती है। कलश में डालने के लिए साबुत अक्षत यानी बिना टूटे चावल का इस्तेमाल करें। इसके ऊपर जटा वाला नारियल रखना शुभ माना जाता है। नारियल को लाल चुनरी या मौली से लपेटकर कलश पर स्थापित किया जाता है।
शुभ मुहूर्त में ही करें घटस्थापना
कलश स्थापना को शुभ मुहूर्त में करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में घटस्थापना करने से बचना चाहिए। इसके अलावा चित्रा नक्षत्र के दौरान भी स्थापना को लेकर कुछ परंपराओं में सावधानी बरतने की बात कही गई है। इसलिए पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय देखना उचित माना जाता है।
कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री की सूची
घटस्थापना के लिए मिट्टी, तांबे या पीतल का कलश, शुद्ध जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी, अक्षत, दूर्वा, लौंग, इलायची और हल्दी की गांठ रखी जा सकती है। इसके अलावा आम या अशोक के पांच या सात पत्ते, जटा वाला नारियल, लाल चुनरी या कलावा, मिट्टी का चौड़ा पात्र और जौ की आवश्यकता होती है। पूजा के लिए रोली, चंदन, कुमकुम, धूप, दीप, घी, कपूर, फूल और फल भी तैयार रखें।
नवरात्रि में कलश स्थापना की विधि जानें
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद मिट्टी के चौड़े पात्र में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं। अब कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरें। इसमें सिक्का, दूर्वा, सुपारी, अक्षत और हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी या मौली से बांधकर कलश के ऊपर स्थापित करें।
स्वास्तिक बनाकर करें देवी का आह्वान
कलश के ऊपर स्वास्तिक का चिह्न बनाकर उसे जौ बोए गए पात्र के बीच स्थापित करें। इसके बाद मां दुर्गा का विधिवत आह्वान और पूजन करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी के मंत्रों का पाठ कर सकते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
आरती और क्षमा प्रार्थना के साथ पूजा करें पूर्ण
कलश स्थापना और देवी पूजन के बाद मां दुर्गा की आरती करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा के अंत में शंखनाद करना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद देवी से पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें। इस प्रकार श्रद्धा, स्वच्छता और अपनी पारिवारिक धार्मिक परंपराओं के अनुसार नवरात्रि की घटस्थापना की जा सकती है।
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