CG Employees News : रायपुर में छत्तीसगढ़ के कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की नजर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई थी। संगठनों को उम्मीद थी कि लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता, एरियर भुगतान, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और पदोन्नति जैसी मांगों पर सरकार की ओर से चर्चा हो सकती है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का दावा है कि कैबिनेट बैठक में इन मांगों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। इसके बाद संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।
लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों में बनी थी उम्मीद
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इन्हीं मांगों को लेकर संगठन लगातार सरकार के समक्ष अपनी बात रखते रहे हैं। कैबिनेट बैठक से पहले उम्मीद थी कि सरकार इन विषयों पर कोई निर्णय या आगे की प्रक्रिया स्पष्ट कर सकती है। लेकिन बैठक के बाद संगठनों के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ, जिससे अब आगे की रणनीति पर विचार शुरू हो गया है।
DA बढ़ोतरी और एरियर भुगतान प्रमुख मांग
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ते यानी DA में बढ़ोतरी और लंबित एरियर का भुगतान शामिल है। संगठनों का कहना है कि महंगाई के मौजूदा दौर में कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते का मुद्दा महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही पुराने लंबित एरियर के भुगतान को लेकर भी कर्मचारी संगठन सरकार से पहल की मांग कर रहे हैं।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा की भी मांग
कर्मचारी संगठनों की ओर से कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग भी उठाई जा रही है। संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को इलाज के दौरान आर्थिक और प्रक्रियात्मक परेशानियों से राहत देने के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपयोगी हो सकती है। इसके अलावा पदोन्नति से संबंधित विषयों को भी संगठन अपनी प्रमुख मांगों में शामिल बता रहे हैं।
सात लाख कर्मचारी-पेंशनरों से जुड़ी मांगों का दावा
विभिन्न कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इन मांगों का प्रभाव प्रदेश के करीब सात लाख अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़ा हुआ है। कैबिनेट बैठक के बाद अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी बैठकों में मौजूदा स्थिति पर चर्चा शुरू कर दी है। संगठनों के बीच आगे की रणनीति को लेकर विचार-विमर्श का दौर जारी है।
2 अक्टूबर को रायपुर में आपात बैठक
लंबित मांगों को लेकर 2 अक्टूबर को रायपुर में कर्मचारी संगठनों की आपात बैठक प्रस्तावित है। संयुक्त मोर्चा, ‘एक मांग एक मंच अभियान’ और पेंशनर फोरम से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों के इस बैठक में शामिल होने की बात कही गई है। बैठक में सरकार के रुख और मांगों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के साथ आगे की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।
मुख्य सचिव को सौंपा गया पांच सूत्रीय मांग-पत्र
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, उनकी ओर से मुख्य सचिव के नाम पांच सूत्रीय मांग-पत्र पहले ही सौंपा जा चुका है। इसमें कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों को शामिल किया गया है। संगठन अब सरकार की ओर से इन मांगों पर किसी ठोस पहल का इंतजार कर रहे हैं।
10 अक्टूबर तक सरकार की पहल का इंतजार
संगठनों ने कहा है कि वे 10 अक्टूबर तक सरकार की ओर से किसी ठोस पहल का इंतजार करेंगे। उनके मुताबिक, यदि निर्धारित समय तक मांगों को लेकर सकारात्मक कदम नहीं उठाया जाता है, तो राज्योत्सव से पहले प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल 2 अक्टूबर की आपात बैठक को आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आंदोलन की रणनीति पर बैठक में होगा फैसला
कर्मचारी संगठनों की आगामी बैठक में यह तय किया जा सकता है कि लंबित मांगों को लेकर सरकार के सामने किस तरह अपनी बात रखी जाए। हालांकि, आंदोलन की अंतिम रूपरेखा और उसके स्वरूप को लेकर निर्णय बैठक में चर्चा के बाद ही सामने आएगा। इस बीच कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर सरकार की अगली पहल पर बनी हुई है।
Read More : CM Vishnu Deo Sai: कांग्रेस पर बरसे सीएम साय, बोले- कभी EVM तो कभी चुनाव आयोग को ठहराती है दोषी