सरगुजा के उदयपुर क्षेत्र में करंट लगने से हाथी शावक की मौत की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि फसल बचाने के लिए खेतों के आसपास बिजली वाले तार लगाए गए थे। रात में हाथियों का दल वहां पहुंचा और शावक करंट की चपेट में आ गया। मामले की जांच जारी है।
सरगुजा के उदयपुर क्षेत्र में करंट लगने से हाथी शावक की मौत की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि फसल बचाने के लिए खेतों के आसपास बिजली वाले तार लगाए गए थे। रात में हाथियों का दल वहां पहुंचा और शावक करंट की चपेट में आ गया। मामले की जांच जारी है।

Surguja Elephant Death : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के उदयपुर वन क्षेत्र में करंट की चपेट में आने से एक हाथी शावक की मौत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि खेतों में खड़ी फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए बिजली प्रवाहित तार लगाए गए थे। इन्हीं तारों के संपर्क में आने के बाद हाथी शावक की जान चली गई। घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष तथा खेतों के आसपास असुरक्षित विद्युत तारों के खतरे को उजागर किया है।

घटना के दौरान हाथियों का दल आसपास मौजूद था। शावक के करंट की चपेट में आने के बाद दल में बेचैनी फैल गई। ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों की चिंघाड़ की आवाज रातभर सुनाई देती रही। वन विभाग को घटना की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ाई गई।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खेतों में फसल को हाथियों और दूसरे जंगली जानवरों से बचाने के उद्देश्य से बिजली वाले तार लगाए गए थे। ऐसे तार वन्यजीवों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। कई बार हाथियों के रास्ते खेतों और जंगल की सीमा से होकर गुजरते हैं। इस दौरान यदि रास्ते में करंट प्रवाहित तार मौजूद हों तो उनके संपर्क में आने से गंभीर हादसा हो सकता है।
उदयपुर वन परिक्षेत्र में पिछले कुछ समय से हाथियों की गतिविधियां लगातार दर्ज की जा रही हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक क्षेत्र में हाथियों के अलग-अलग समूहों की मौजूदगी के कारण वन विभाग ने निगरानी व्यवस्था बढ़ाई है। छह सर्किलों को दो हिस्सों में बांटकर चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने के साथ ग्रामीणों को भी संभावित खतरे से बचाना है।
मानव-हाथी संघर्ष वाले इलाकों में वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती रहती है। एक तरफ हाथियों को आबादी और खेतों से दूर सुरक्षित रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की फसल और जान-माल की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। खेतों के आसपास अवैध या असुरक्षित विद्युत बाड़ लगाने से समस्या और गंभीर हो सकती है। केंद्र सरकार के मानव-हाथी संघर्ष संबंधी दिशा-निर्देशों में भी घातक विद्युत बाड़ रोकने और बिजली लाइनों की सुरक्षित व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में फसल बचाने या वन्यजीवों के शिकार के लिए करंट प्रवाहित तार लगाए जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। 2024 में बलरामपुर में खेत की फसल बचाने के लिए लगाए गए करंट वाले तार की चपेट में एक वयस्क नर हाथी की मौत हुई थी। इसी तरह 2026 में जशपुर के दुलदुला क्षेत्र में करंट वाले तार से नर हाथी की मौत के मामले में वन विभाग ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
हाथी शावक की मौत की घटना के बाद वन्यजीव सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों और वन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसे इलाकों में सुरक्षित फसल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना है, जहां हाथियों की आवाजाही नियमित रहती है। खेतों और जंगल के बीच बिजली के तारों की निगरानी, ग्रामीणों में जागरूकता और वन विभाग तथा बिजली विभाग के बीच बेहतर समन्वय से इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
सरगुजा में हाथी शावक की मौत ने यह स्पष्ट किया है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को कम करने के लिए सुरक्षित उपायों की जरूरत लगातार बनी हुई है। फसल नुकसान से परेशान ग्रामीणों को भी ऐसे तरीके अपनाने होंगे, जिनसे वन्यजीवों की जान खतरे में न पड़े। वहीं वन विभाग को हाथियों के पारंपरिक आवागमन वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी और जागरूकता अभियान मजबूत करने की जरूरत है।
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