Brain Fog in Youth : बार-बार चीजें भूलना, किसी काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना या बातचीत के दौरान अचानक किसी दूसरी बात में खो जाना हमेशा थकान की वजह से नहीं होता। अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इनके पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं। आजकल कई युवा दिमाग ठीक से काम न करने, फोकस की कमी और बातें याद न रहने जैसी शिकायत करते हैं। इसे आमतौर पर ब्रेन फॉग कहा जाता है।
ब्रेन फॉग बीमारी नहीं, बल्कि लक्षणों का समूह
ब्रेन फॉग अपने आप में कोई बीमारी या मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है। यह कुछ ऐसे लक्षणों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य शब्द है, जिनमें व्यक्ति को ध्यान लगाने, चीजें याद रखने, स्पष्ट सोचने या बातचीत पर फोकस करने में परेशानी हो सकती है। डॉ. अजय फड़के, एगिलस डायग्नोस्टिक्स के अनुसार, जरूरी यह समझना है कि इन लक्षणों के पीछे वास्तविक वजह क्या है।
नींद की कमी और तनाव बढ़ा सकते हैं परेशानी
ब्रेन फॉग के पीछे कई बार हमारी रोजमर्रा की आदतें जिम्मेदार हो सकती हैं। पर्याप्त नींद न लेना, लगातार तनाव में रहना, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप चलाना, समय पर खाना न खाना और जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी या शराब का सेवन मानसिक एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपनी दिनचर्या सुधारने की कोशिश करनी चाहिए।
7 घंटे की नींद और नियमित दिनचर्या जरूरी
विशेषज्ञ के मुताबिक, रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं तथा कम से कम सात घंटे की नींद लेने का प्रयास करें। समय पर भोजन करें, पर्याप्त पानी पिएं और नियमित रूप से हल्की कसरत करें। काम या पढ़ाई के बीच छोटे ब्रेक लेना भी मददगार हो सकता है। इन बदलावों को दो से चार सप्ताह तक अपनाकर देखें। इसके बाद भी समस्या बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
किन स्वास्थ्य समस्याओं की जांच जरूरी हो सकती है?
लगातार ब्रेन फॉग के पीछे आयरन की कमी, एनीमिया, विटामिन B12 की कमी, थायरॉइड में गड़बड़ी और ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव जैसी वजहें हो सकती हैं। इनमें से कई कारण सामान्य ब्लड टेस्ट के जरिए पहचाने जा सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए सभी जांच जरूरी नहीं होतीं। डॉक्टर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर टेस्ट तय करते हैं।
B12 और आयरन की कमी पर दें खास ध्यान
विटामिन B12 की कमी भी ध्यान और याददाश्त से जुड़ी शिकायतों का एक कारण हो सकती है। शाकाहारी लोगों में B12 की कमी का जोखिम अधिक हो सकता है, क्योंकि इसके प्रमुख आहार स्रोतों में मांस, अंडे और डेयरी उत्पाद शामिल हैं। लंबे समय तक एसिडिटी की कुछ दवाएं या डायबिटीज की दवा मेटफॉर्मिन लेने वालों में भी B12 कम हो सकता है। महिलाओं में पीरियड्स के दौरान आयरन की कमी भी देखी जा सकती है।
स्लीप एपनिया और मानसिक स्वास्थ्य भी हो सकते हैं कारण
ब्रेन फॉग के पीछे स्लीप एपनिया जैसी नींद संबंधी समस्या भी हो सकती है। इसमें व्यक्ति पर्याप्त समय सोने के बावजूद सुबह थकान महसूस कर सकता है। इसके अलावा डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां भी ध्यान और याददाश्त को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ वायरल संक्रमणों, जैसे कोविड, के बाद भी कुछ लोगों में कई हफ्तों तक ऐसे लक्षण बने रह सकते हैं। कुछ दवाएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
डॉक्टर किन टेस्ट की सलाह दे सकते हैं?
आमतौर पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार CBC, फेरिटिन, विटामिन B12, थायरॉइड और ब्लड शुगर जैसी जांचों पर विचार कर सकते हैं। अगर B12 का स्तर सामान्य सीमा के निचले हिस्से में हो और लक्षण जारी रहें, तो डॉक्टर होमोसिस्टीन जैसे अतिरिक्त टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। कौन-सी जांच जरूरी है, इसका फैसला व्यक्ति की स्थिति के आधार पर होना चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
अगर ब्रेन फॉग के कारण पढ़ाई, ऑफिस का काम या रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होने लगें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। लगातार थकान, अचानक वजन बढ़ना या घटना, चक्कर, कमजोरी, हाथ-पैर में झुनझुनी, जल्दी सांस फूलना या लंबे समय तक उदासी जैसे लक्षणों के साथ भी चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
अचानक कन्फ्यूजन हो तो तुरंत इमरजेंसी जाएं
अचानक बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन, बोलने में परेशानी, चेहरे या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, बेहद तेज सिरदर्द, दौरा या बेहोशी जैसी स्थिति को सामान्य ब्रेन फॉग समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए। ये गंभीर स्वास्थ्य समस्या के संकेत हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में तत्काल इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
समस्या को सिर्फ तनाव समझकर न टालें
ब्रेन फॉग के लक्षण कई अलग-अलग कारणों से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक याददाश्त, एकाग्रता या सोचने में परेशानी बनी रहने पर इसे केवल तनाव या व्यस्त जीवनशैली मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई मामलों में कारण सामान्य जांचों से सामने आ सकता है और उचित चिकित्सकीय सलाह से उसका उपचार संभव हो सकता है।
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