India Ukraine Ceasefire : रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के पांचवें साल में प्रवेश के साथ कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में यूक्रेन के विदेश मंत्री अंदरी सिबीहा ने नाटो महासचिव के चीफ ऑफ स्टाफ जेफ्री वान लीवेन से मुलाकात की। बैठक में रूस के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों से यूक्रेनी शहरों की सुरक्षा, नाटो के साथ सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
सिबीहा ने नाटो अधिकारी को दी हमलों की जानकारी
यूक्रेन की न्यूज वेबसाइट Eurointegration के अनुसार, विदेश मंत्री अंदरी सिबीहा ने सोशल मीडिया के जरिए बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने जेफ्री वान लीवेन को रूस की ओर से किए जा रहे हालिया हवाई हमलों के बारे में विस्तार से बताया। सिबीहा के मुताबिक, रूस अब नए जेट चालित ‘शाहेद ड्रोन’ का भी इस्तेमाल कर रहा है, जिससे यूक्रेन के सामने हवाई सुरक्षा की चुनौती और गंभीर हो गई है।
कीव में सितंबर में 230 से ज्यादा एयर रेड अलर्ट
यूक्रेनी विदेश मंत्री ने बताया कि रूस के हवाई हमलों का असर लगातार बढ़ रहा है। अकेले सितंबर महीने में यूक्रेन की राजधानी कीव में 230 से अधिक बार एयर-रेड चेतावनियां जारी की गईं। इन चेतावनियों के दौरान नागरिकों को संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जाती है। यूक्रेन लगातार अपनी वायु रक्षा क्षमता मजबूत करने की मांग करता रहा है।
नाटो देशों की सुरक्षा पर भी जताई चिंता
सिबीहा ने बैठक के दौरान यह भी कहा कि रूस की सैन्य गतिविधियों का असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर हमले और कथित उकसावे की घटनाएं नाटो सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए भी चिंता पैदा कर रही हैं। यूक्रेन का कहना है कि यूरोपीय-अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उसकी सैन्य स्थिति महत्वपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग लगातार जरूरी बना हुआ है।
भारत समेत चार देशों ने रखा सीजफायर प्रस्ताव
इसी बीच युद्ध को रोकने और संघर्षविराम की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए भारत, तुर्की, मिस्र और अमेरिका की ओर से प्रस्तावों की चर्चा सामने आई है। यूक्रेनी विदेश मंत्री के अनुसार, इनमें भारत की पहल को व्यापक प्रस्ताव के तौर पर देखा गया है। कीव ने संकेत दिया है कि वह शांति स्थापित करने के उद्देश्य से सामने रखे गए विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने के लिए तैयार है।
ऊर्जा ढांचे और ब्लैक सी पर भारत का प्रस्ताव
यूक्रेन ने विशेष रूप से ऊर्जा बुनियादी ढांचे और काला सागर क्षेत्र में शांति से जुड़े भारत के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख जताया है। युद्ध के दौरान ऊर्जा संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने से यूक्रेन की नागरिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा और काला सागर में स्थिरता को लेकर किसी संभावित समझौते को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युद्ध रोकने के लिए बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय दबाव
रूस-यूक्रेन संघर्ष में अब तक बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हुई है और लाखों लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है। यूक्रेन लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर दबाव बढ़ाने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, विभिन्न देश युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं। भारत समेत कई देशों की पहल के बीच अब संघर्षविराम और संभावित शांति वार्ता को लेकर आगे की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है।
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