Bastar Dussehra : जगदलपुर में विश्व प्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्मों के शुरू होने के साथ ही विशाल रथ निर्माण की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। इसी बीच रथ निर्माण के लिए जंगल से साल के पेड़ काटे जाने को लेकर ग्रामीणों का विरोध सामने आया है। दरभा क्षेत्र में ग्रामीणों ने पेड़ कटाई का विरोध करते हुए अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर सड़क पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण कुछ समय तक यातायात व्यवस्था प्रभावित रही।
रथ निर्माण के लिए साल की लकड़ी लेने पहुंचे थे ग्रामीण
बस्तर दशहरा की पाटजात्रा और डेरी गढ़ई की रस्में पूरी होने के बाद सोमवार को बारसी उतारनी की परंपरा निभाई गई। इसके बाद दशहरा समिति के सदस्यों और चयनित ग्रामीणों का दल रथ निर्माण के लिए जरूरी साल की लकड़ी लेने दरभा क्षेत्र के जंगल पहुंचा। इसी दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने जंगल में पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू कर दिया। धीरे-धीरे विरोध बढ़ा और ग्रामीण सड़क पर बैठ गए।
नेशनल हाईवे-30 पर लगा लंबा जाम
ग्रामीणों के चक्काजाम के चलते नेशनल हाईवे-30 पर यातायात प्रभावित हुआ। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन कुछ समय के लिए बाधित रहा। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखने के साथ ही रथ निर्माण के लिए हर साल पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि परंपरा के नाम पर जंगल पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
हर साल पेड़ काटने से जंगल पर बढ़ रहा दबाव
ग्रामीणों के अनुसार बस्तर दशहरा के रथ निर्माण के लिए हर वर्ष जंगल से कई पेड़ काटे जाते हैं। उनका कहना है कि लगातार पेड़ काटे जाने से स्थानीय जंगलों पर दबाव बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से पेड़ कटाई के बदले पौधारोपण किया जाता है, लेकिन पर्याप्त देखभाल नहीं होने के कारण कई पौधे बड़े होकर पेड़ बनने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं।
तीन से पांच साल तक रथ इस्तेमाल करने की मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि हर साल नया रथ तैयार करने के बजाय एक रथ का उपयोग तीन से पांच वर्षों तक किया जाए। उनका कहना है कि जब तक पुराना रथ पूरी तरह खराब न हो जाए, तब तक नया रथ बनाने के लिए जंगल से लकड़ी न काटी जाए। इसके साथ ही दशहरा की परंपरा को बनाए रखते हुए हर वर्ष जंगल से केवल आवश्यकता के अनुसार एक लकड़ी काटने की व्यवस्था करने की मांग भी रखी गई है।
पौधारोपण और पौधों की सुरक्षा पर जोर
ग्रामीणों ने पौधारोपण से जुड़ी व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की है। उनके अनुसार पौधारोपण जून महीने में किया जाना चाहिए, ताकि पौधों को पर्याप्त समय और अनुकूल परिस्थितियां मिल सकें। इसके अलावा पौधों के पेड़ बनने तक उनकी देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी चौकीदार को देने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने पौधों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की बात भी रखी है।
अधिकारियों ने बातचीत के बाद समाप्त कराया प्रदर्शन
चक्काजाम की सूचना मिलने के बाद दरभा तहसीलदार और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी मांगों को विस्तार से सुना। इसके बाद दरभा तहसीलदार ने ग्रामीणों से आठ सूत्रीय मांगों से संबंधित आवेदन लिया। अधिकारियों की समझाइश और बातचीत के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया, जिसके बाद यातायात व्यवस्था सामान्य होने लगी।
दशहरा में आने वाले ग्रामीणों के लिए सुविधाओं की मांग
ग्रामीणों ने पेड़ कटाई रोकने के अलावा बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए आने वाले ग्रामीणों और देवी-देवताओं से जुड़े लोगों के लिए भी बेहतर व्यवस्थाओं की मांग प्रशासन के सामने रखी है। उनकी मांग है कि जगदलपुर शहर और दशहरा परिसर में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त भोजन और ठहरने की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण और सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
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