Ram Temple Donation Theft : अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए दान की कथित चोरी का मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस ने इस मामले की जांच को लेकर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि विशेष जांच दल यानी SIT की कार्रवाई का फोकस छोटे आरोपियों तक सीमित रहा, जबकि उन प्रभावशाली लोगों की भूमिका की पड़ताल पर्याप्त तरीके से नहीं की गई, जिनकी जिम्मेदारी मंदिर परिसर की व्यवस्था से जुड़ी थी।
जयराम रमेश ने SIT की जांच पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने दावा किया कि मंदिर परिसर में चोरी की घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में 105 बार दर्ज हुई थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी अधिक घटनाओं के बावजूद जांच को जल्द समाप्त करने की जरूरत क्यों पड़ी। कांग्रेस नेता के मुताबिक, मामले की तह तक जाने के लिए चोरी की प्रत्येक घटना, उससे जुड़े लोगों और मंदिर परिसर में मौजूद व्यवस्थागत कमियों की विस्तृत जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों को लेकर कई सवाल सार्वजनिक किए हैं।
CCTV फुटेज मिलने के बाद FIR में देरी क्यों?
कांग्रेस महासचिव ने एफआईआर दर्ज होने में हुई कथित देरी को भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू बताया। उनका कहना है कि चोरी से संबंधित सीसीटीवी फुटेज 4 जून को ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तक पहुंच गया था। इसके अगले दिन, 5 जून को फुटेज देखे जाने की बात भी सामने आई। इसके बावजूद एफआईआर 25 जून को दर्ज की गई। जयराम रमेश ने सवाल किया कि शिकायत दर्ज कराने में 21 दिनों का अंतर क्यों रहा और इस देरी की वजह सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
चंपत राय और अनिल मिश्रा को लेकर सवाल
जयराम रमेश ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि मंदिर परिसर में लगातार चोरी की घटनाएं हुईं, तो ट्रस्ट की जिम्मेदारी से जुड़े इन पदाधिकारियों को आरोपी बनाने के बजाय केवल गवाह क्यों बनाया गया। कांग्रेस नेता ने इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और जांच के दायरे को व्यापक रखने की मांग की है।
105 चोरी की घटनाओं में कितनी रकम गई?
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड समेत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक मामले में करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी हुई है। हालांकि, जयराम रमेश ने सवाल किया कि यदि 105 चोरी की घटनाएं रिकॉर्ड हुईं, तो इन सभी घटनाओं में कुल कितनी धनराशि चोरी हुई, इसका स्पष्ट आंकड़ा अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
कांग्रेस ने इस मामले को शुरुआत से ही संवेदनशील बताते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। कांग्रेस का तर्क है कि राम मंदिर से जुड़ा मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है, इसलिए जांच ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी भी पक्ष के प्रति पक्षपात की आशंका न रहे और वास्तविक जिम्मेदारी तय हो सके।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी निशाना
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर सक्रिय रहती है, लेकिन राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान से जुड़ी कथित चोरी के मामले में जवाबदेही तय करने को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही। हालांकि, कांग्रेस के ये आरोप राजनीतिक दावे हैं और मामले की जांच तथा अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम जिम्मेदारी तय होगी।
जांच और जवाबदेही को लेकर बढ़ी मांग
राम मंदिर दान चोरी मामले में अब मुख्य सवाल चोरी की घटनाओं की वास्तविक संख्या, कथित तौर पर चोरी हुई कुल रकम, एफआईआर में देरी और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। कांग्रेस इन सवालों के जवाब के लिए स्वतंत्र जांच पर जोर दे रही है। वहीं, पुलिस की चार्जशीट में नामजद आरोपियों और बरामदगी से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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