Saurav Das Protest : शनिवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान एक महिला पत्रकार ने पुलिस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। महिला पत्रकार ने ACP विवेक भगत पर कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद प्रदर्शन स्थल और पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के आसपास स्थिति को लेकर विवाद बढ़ गया। प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने मामले में तत्काल कार्रवाई और शिकायत दर्ज करने की मांग की।
CJP ने पीड़िता के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचकर उठाई आवाज
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि कथित पीड़िता के साथ एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस स्टेशन के अंदर मौजूद है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल में रत्ना सिंह, वृंदा करात, आइशी घोष और ऋषभ रंजन समेत अन्य लोग शामिल हैं। सौरव के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात करने और पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहने का अनुरोध किया है।
पुलिस से बातचीत को लेकर सामने आया विवाद
सौरव दास ने इससे पहले पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि शिकायतकर्ता अपने वकीलों और अन्य सहयोगियों के साथ वहां मौजूद हैं। उनका सवाल था कि पुलिस अधिकारी उनसे बातचीत करने से क्यों बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस को बातचीत के लिए कुछ समय दिया है और अगर उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलती है तो वे आगे की कार्रवाई करेंगे।
पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन
सौरव दास ने दावा किया कि प्रतिनिधिमंडल पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद था और पुलिस कथित पीड़िता से मिलने को तैयार नहीं थी। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि जब तक प्रतिनिधिमंडल को पुलिस अधिकारियों से मिलने और शिकायत पर चर्चा करने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक वे वहां मौजूद रहेंगे। प्रदर्शनकारियों ने ACP के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी दोहराई।
पुलिस के सामने आईं तीन शिकायतें
इस पूरे विवाद पर दिल्ली पुलिस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पुलिस के अनुसार, मामले से संबंधित तीन शिकायतें प्राप्त हुई हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन शिकायतों को रविवार, 4 अक्टूबर को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। अब शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच संबंधित जांच एजेंसी द्वारा की जाएगी।
दिल्ली पुलिस ने सबूतों की बात कही
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में कैमरापर्सन और पत्रकार मौजूद थे। ऐसे में यदि कथित घटना हुई है तो उसके संबंध में वीडियो या अन्य कोई साक्ष्य सामने आ सकता है। अधिकारी के मुताबिक, जांच के दौरान उपलब्ध फुटेज और अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जा सकती है। पुलिस ने यह भी संकेत दिया कि शिकायत के पीछे पुलिस को निशाना बनाने का आरोप लगाया जा रहा है।
आरोपों की जांच से सामने आएगी तस्वीर
फिलहाल महिला पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोप और दिल्ली पुलिस की ओर से दी गई जानकारी, दोनों इस मामले के अलग-अलग पक्ष सामने रखते हैं। एक तरफ प्रदर्शनकारी शिकायतकर्ता के आरोपों पर तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस ने शिकायतों को क्राइम ब्रांच को भेजे जाने की बात कही है। ऐसे में जांच के दौरान CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
राजनीतिक प्रदर्शन के बीच बढ़ा विवाद
यह पूरा मामला उस समय सामने आया है जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन की कवरेज कर रही महिला पत्रकार द्वारा पुलिस अधिकारी पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक प्रदर्शन के बीच एक अलग विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
क्राइम ब्रांच करेगी शिकायतों की जांच
दिल्ली पुलिस द्वारा तीन शिकायतें क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के बाद मामले की औपचारिक जांच का रास्ता साफ हो गया है। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की बात कह रही है। इसलिए फिलहाल आरोपों को अंतिम तथ्य मानने के बजाय जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी होगा।
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