Shahzad Bhatti Network : उत्तर प्रदेश में आतंकी गतिविधियों और संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच कर रही एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी ATS ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पाकिस्तानी गैंग्स्टर शहजाद भट्टी से कथित तौर पर जुड़े नेटवर्क की जांच को लेकर एजेंसी की अलग-अलग टीमें कई जिलों में सक्रिय हैं। रविवार शाम तक ATS ने अलग-अलग स्थानों पर संदिग्ध लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ की। जांच एजेंसी अब उन संभावित संपर्कों को तलाश रही है, जिनके जरिए इस नेटवर्क की गतिविधियां उत्तर प्रदेश तक पहुंची हो सकती हैं।
पश्चिमी यूपी से नेपाल सीमा तक जांच का दायरा
ATS की कार्रवाई केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। जांच का दायरा नेपाल सीमा से सटे जिलों तक भी पहुंच गया है। मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़, पीलीभीत, बहराइच और श्रावस्ती समेत कई जिलों में एजेंसी की टीमें संदिग्ध गतिविधियों और संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों की नजर ऐसे लोगों पर है, जिनका किसी संदिग्ध नेटवर्क से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क होने की जानकारी जांच के दौरान सामने आई है।
संदिग्धों के डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
जांच के दौरान ATS संदिग्धों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की भी जांच कर रही है। एजेंसी सोशल मीडिया अकाउंट, चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल संपर्कों से जुड़ी जानकारी को खंगाल रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि संदिग्ध लोगों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या किसी बाहरी नेटवर्क से उनके संबंध स्थापित हुए थे। डिजिटल सबूतों को जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है।
पुराने आरोपियों से मिले इनपुट अहम
सूत्रों के मुताबिक, नए संदिग्धों की पहचान पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर की गई है। पूछताछ में सामने आए नाम, संपर्क और अन्य जानकारियों को जांच टीम आगे बढ़ा रही है। एजेंसी इन सुरागों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने के बाद संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका कथित नेटवर्क से वास्तविक संबंध था या नहीं।
शहजाद भट्टी नेटवर्क से संपर्क की पड़ताल
ATS का मुख्य फोकस इस बात पर है कि जिन लोगों से पूछताछ की गई, उनका शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क के साथ किस प्रकार का संपर्क था। जांच एजेंसी उनकी संभावित भूमिका के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर मौजूद संपर्कों की भी जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा किसी संदिग्ध गतिविधि के लिए कथित लॉजिस्टिक सहायता, ठिकाने, संसाधन या अन्य सहयोग उपलब्ध कराने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
स्थानीय संपर्कों की तलाश जारी
जांचकर्ताओं का मानना है कि किसी भी बड़े नेटवर्क की गतिविधियों को समझने के लिए उसके स्थानीय संपर्कों की पहचान महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी वजह से ATS उन लोगों और संपर्क सूत्रों की जानकारी जुटा रही है, जिनका नाम पहले की जांच में सामने आया है। एजेंसी यह भी देख रही है कि अलग-अलग जिलों में चिन्हित लोगों के बीच आपसी संपर्क या कोई साझा डिजिटल कड़ी मौजूद है या नहीं।
पूछताछ के बाद कुछ लोगों को छोड़ा
सूत्रों के अनुसार, ATS की पूछताछ पूरी होने के बाद कुछ लोगों को छोड़ दिया गया है। वहीं, कुछ अन्य संदिग्धों के मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच अभी जारी है। किसी व्यक्ति से पूछताछ होना अपने आप में उसके अपराध में शामिल होने की पुष्टि नहीं करता। जांच एजेंसी डिजिटल और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
फोरेंसिक जांच से मिल सकते हैं अहम सुराग
मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच से संभावित संपर्कों, बातचीत और गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। ATS कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए इन तकनीकी सबूतों का विश्लेषण कर रही है। जांचकर्ताओं की कोशिश यह पता लगाने की है कि संदिग्धों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या ये संपर्क किसी संगठित गतिविधि से जुड़े थे।
नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश
ATS अब पूरे मामले में सामने आए सुरागों को जोड़कर कथित सिंडिकेट की संरचना और संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर नेपाल सीमा से लगे जिलों तक चल रही कार्रवाई इसी जांच का हिस्सा बताई जा रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ, डिजिटल फोरेंसिक और अन्य जांच के आधार पर नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल एजेंसी की ओर से जांच से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल जारी है और संदिग्धों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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