France Protest: फ्रांस में स्कूलों की फंडिंग, बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है। मंगलवार को देशभर में करीब 2.66 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया, जबकि राजधानी पेरिस में लगभग 56 हजार लोग सड़कों पर उतरे। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और दंगा-रोधी पुलिस के बीच तनाव देखने को मिला।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह झड़प
प्रदर्शन के दौरान कुछ इलाकों में हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस और अन्य दंगा नियंत्रण उपकरणों का इस्तेमाल किया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, मंगलवार के प्रदर्शनों के दौरान करीब 500 लोगों को हिरासत में लिया गया। पिछले दो सप्ताह से जारी स्कूल बहिष्कार और कक्षाओं की नाकेबंदी के बीच अब तक 6,500 से अधिक गिरफ्तारियां होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की बताई गई है।
कई शहरों तक फैल चुका है आंदोलन
यह आंदोलन सितंबर के मध्य में पेरिस क्षेत्र के एक हाई स्कूल से शुरू हुआ था। इसके बाद धीरे-धीरे यह फ्रांस के कई शहरों तक फैल गया। मार्सेई, स्ट्रासबर्ग और लिली समेत विभिन्न शहरों में छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने झंडे और पोस्टर लेकर मार्च किया। छात्र संगठनों ने गुरुवार को दोबारा प्रदर्शन करने का आह्वान किया है और कहा है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
गृह मंत्री ने पुलिस कार्रवाई को बताया उचित
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अधिकतर मामलों में पुलिस की प्रतिक्रिया उचित थी। उनके मुताबिक, कुछ जगह शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक घटनाओं में बदल गए, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रधानमंत्री ने छात्रों की चिंताओं पर दिया जोर
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार और स्कूल प्रशासन को छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए और उनके समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। संसद में प्रदर्शन के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने स्कूलों और लोगों के लिए खतरा पैदा करने वाली अत्यधिक हिंसा की निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना की शिकायत सामने आने पर उसकी जांच की जाएगी।
स्कूलों में सुविधाओं की कमी बनी मुख्य वजह
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख शिकायत स्कूलों में संसाधनों और अवसरों की कमी को लेकर है। छात्रों ने जर्जर कक्षाओं, पर्याप्त डेस्क-कुर्सियां नहीं होने, गर्मियों में कमरों के अत्यधिक गर्म होने और कुछ स्कूलों में चूहों की समस्या का मुद्दा उठाया है। शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों की कमी तथा बढ़ते काम के दबाव को लेकर भी छात्र आवाज उठा रहे हैं।
891 स्कूलों में पढ़ाई हुई प्रभावित
पेरिस के हेलीने बुशे हाई स्कूल में प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों और साइकिलों की मदद से सड़क पर अस्थायी बैरिकेड बनाया। इसके बाद स्कूल बंद कर दिया गया। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को देश के 891 स्कूलों में कक्षाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से निलंबित रहीं। इससे आंदोलन के शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
छात्रों की शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू
सरकार ने छात्रों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। इसके जरिए हाई स्कूल के विद्यार्थी गुमनाम तरीके से अपने स्कूलों में मौजूद समस्याओं और जरूरी बदलावों के बारे में राय दे सकते हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि केवल शिकायतें दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को उनके आधार पर ठोस कदम उठाने होंगे।
बेल्जियम में भी दिखा छात्र आंदोलन का असर
फ्रांस के आंदोलन के बीच पड़ोसी देश बेल्जियम में भी छात्रों के प्रदर्शन की खबर सामने आई है। मंगलवार को पूर्वी शहर लीज में 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी मिली। ब्रसेल्स सहित कुछ अन्य शहरों में भी छोटे स्तर पर प्रदर्शन हुए। ऐसे में शिक्षा, संसाधनों और युवाओं की मांगों को लेकर आंदोलन का प्रभाव सीमाओं के पार भी दिखाई देने लगा है।
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