Crude Oil Price : दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। विटोल ग्रुप के CEO रसेल हार्डी ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति और बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की स्थिति बन सकती है। हालांकि, यह एक संभावित जोखिम का आकलन है, कीमतों में इतनी बढ़ोतरी होने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं। हार्डी ने लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम में यह बात कही।
ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड वायदा 4.1 प्रतिशत की तेजी के साथ 104.28 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड भी 3.6 प्रतिशत बढ़कर 91.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, जहाजों पर हमलों और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने बाजार की चिंता बढ़ाई। अमेरिका के खाड़ी तट पर तूफान से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका ने भी कीमतों को सहारा दिया।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। पश्चिम एशिया के तेल उत्पादक देशों से निकलने वाले टैंकरों के लिए यह रास्ता बेहद अहम है। इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले या आवाजाही में बाधा आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में तेल की कीमतों के साथ माल ढुलाई, बीमा और परिवहन की लागत भी बढ़ सकती है।
रोजाना 14 मिलियन बैरल आपूर्ति पर बाजार की नजर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रसेल हार्डी ने बताया कि पिछले 7 से 10 दिनों में पश्चिम एशिया से प्रतिदिन लगभग 12 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 2 मिलियन बैरल रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद बाहर भेजे गए। यानी कुल आपूर्ति करीब 14 मिलियन बैरल प्रतिदिन रही। हार्डी के अनुसार, वैश्विक बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए इस आपूर्ति का जारी रहना जरूरी है। यदि इसमें गंभीर रुकावट आती है, तो 200 डॉलर प्रति बैरल वाला जोखिम बढ़ सकता है।
पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर पड़ सकता है। रिफाइनिंग क्षमता में कमी और परिवहन संबंधी मुश्किलें कीमतों को और बढ़ा सकती हैं। हार्डी ने संकेत दिया है कि रिफाइंड उत्पादों की आपूर्ति पर दबाव सर्दियों तक बना रह सकता है। हालांकि, वास्तविक असर तेल की कीमत, उपलब्ध भंडार, रिफाइनिंग लागत और सरकारों के फैसलों पर निर्भर करेगा। <
भारत में पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हो सकता है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी होने पर आयात बिल, रुपये की विनिमय दर और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। यदि कच्चा तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो भारत के लिए आर्थिक चुनौतियां गंभीर हो सकती हैं। कुछ अनुमानों में पेट्रोल 165 रुपये और डीजल 155 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने की आशंका जताई गई है, लेकिन इन कीमतों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं है। वास्तविक खुदरा दरें करों, तेल कंपनियों की लागत और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेंगी।
आगे तेल बाजार की दिशा क्या होगी?
आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही, पश्चिम एशिया का सुरक्षा हालात और वैश्विक आपूर्ति तेल बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन लंबे समय तक बाधा रहने पर महंगाई और ऊर्जा लागत बढ़ने का खतरा बना रहेगा। फिलहाल 200 डॉलर प्रति बैरल को संभावित जोखिम के रूप में देखना चाहिए, निश्चित कीमत के रूप में नहीं।
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