Menopause Bone Health : मेनोपॉज़ महिलाओं के जीवन का एक प्राकृतिक चरण है, जो आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच आता है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन जैसे प्रजनन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। हार्मोन में होने वाला यह बदलाव शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है, खासकर हड्डियों की सेहत को। नई दिल्ली स्थित आकाश हेल्थकेयर के ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. आशीष चौधरी के अनुसार, मेनोपॉज़ के दौरान हड्डियों के घनत्व में कमी आने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इस उम्र में महिलाओं के लिए हड्डियों की देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है।
एस्ट्रोजन की कमी से बढ़ सकता है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा
एस्ट्रोजन महिलाओं की हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। मेनोपॉज़ के करीब आने और उसके बाद इस हार्मोन का स्तर घटने से हड्डियों का घनत्व तेजी से कम हो सकता है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ता है। इस स्थिति में हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं तथा मामूली चोट लगने पर भी फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ सकती है। मेनोपॉज़ के बाद शुरुआती वर्षों में हड्डियों का नुकसान अधिक तेजी से हो सकता है। हालांकि, इसका स्तर हर महिला में अलग-अलग हो सकता है। उम्र, पारिवारिक इतिहास, खानपान और शारीरिक गतिविधियां भी हड्डियों की सेहत को प्रभावित करती हैं।
कैल्शियम से भरपूर आहार को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम जरूरी पोषक तत्व है। महिलाओं को अपने भोजन में दूध, दही, पनीर, बादाम, ब्रोकली और कैल्शियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। टोफू तथा कुछ मछलियां भी उपयोगी विकल्प हो सकती हैं। सामान्य तौर पर 19 से 50 वर्ष की महिलाओं के लिए प्रतिदिन 1,000 मिलीग्राम कैल्शियम की सिफारिश की जाती है। अधिक उम्र में जरूरत बदल सकती है। यदि भोजन से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिल रहा है, तो सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत से ज्यादा कैल्शियम लेना भी उचित नहीं है।
नियमित व्यायाम से हड्डियों को मिल सकती है मजबूती
हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार के साथ शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है। पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना और अपनी क्षमता के अनुसार जॉगिंग जैसी वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकती हैं। हल्की शक्ति बढ़ाने वाली एक्सरसाइज भी उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, जिन महिलाओं को पहले से ऑस्टियोपोरोसिस, जोड़ों की समस्या या फ्रैक्चर का खतरा है, उन्हें व्यायाम शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। नियमित गतिविधि के साथ संतुलन बनाए रखने वाले अभ्यास गिरने और चोट लगने का जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं।
विटामिन D की कमी से बचना भी जरूरी
कैल्शियम के बेहतर अवशोषण के लिए शरीर को विटामिन D की आवश्यकता होती है। इसकी कमी हड्डियों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। सैल्मन, ट्राउट और टूना जैसी मछलियां, अंडे की जर्दी, मशरूम तथा विटामिन D से फोर्टिफाइड दूध और अनाज इसके स्रोत हो सकते हैं। सुरक्षित तरीके से धूप में समय बिताना भी शरीर में विटामिन D बनने में मदद करता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच के आधार पर सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं।
मेनोपॉज़ के बाद हड्डियों की जांच कब कराएं?
मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं को हड्डियों की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त कैल्शियम-विटामिन D पर ध्यान देना उपयोगी है। जिन महिलाओं में फ्रैक्चर, कम वजन या ऑस्टियोपोरोसिस के अन्य जोखिम हैं, उन्हें डॉक्टर से बोन डेंसिटी जांच की जरूरत के बारे में पूछना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से हड्डियों की कमजोरी का पता लगाने और उचित देखभाल की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
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