US PERM Suspension : अमेरिका में PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम को लेकर सामने आए सस्पेंशन के दावे ने विदेशी कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, Microsoft, Adobe और छह अन्य आईटी कंपनियों से जुड़े कर्मचारियों की एम्प्लॉयर-स्पॉन्सर्ड ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस कदम का असर उन लोगों पर पड़ने की आशंका है, जिनका स्थायी निवास पाने का आवेदन अभी शुरू नहीं हुआ है या प्रक्रिया में है। हालांकि, किसी कंपनी से संबंधित PERM कार्रवाई का अर्थ सभी कर्मचारियों के H-1B वीजा रद्द होना नहीं है।
किन आठ आईटी कंपनियों के नाम सामने आए?
रिपोर्ट में Microsoft, Adobe, Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCL Technologies और Capgemini के नाम शामिल हैं। इसमें दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने PERM प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं या दुरुपयोग की जांच के सिलसिले में कार्रवाई की है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का नाम भी जांच शुरू कराने के संदर्भ में सामने आया है। हालांकि, इन दावों, कार्रवाई के दायरे और प्रत्येक कंपनी की मौजूदा स्थिति की पुष्टि आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों से करना आवश्यक है।
PERM क्या है और ग्रीन कार्ड में इसकी भूमिका क्या है?
PERM अमेरिकी रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसमें नियोक्ता को आम तौर पर यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित स्थायी नौकरी के लिए निर्धारित श्रम बाजार संबंधी शर्तें पूरी की गई हैं। यह प्रक्रिया अमेरिकी श्रम विभाग के तहत संचालित होती है। कई रोजगार-आधारित मामलों में PERM प्रमाणन के बिना नियोक्ता आगे की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकता। इसलिए यदि किसी कर्मचारी के लिए यह चरण रुक जाता है, तो स्थायी निवास की दिशा में आगे बढ़ने में देरी हो सकती है।
H-1B वीजा पर क्या होगा असर?
H-1B वीजा अमेरिका में विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी अधिकतम अवधि छह साल होती है, हालांकि पात्र मामलों में निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त समय मिल सकता है। PERM प्रक्रिया में देरी होने से कुछ कर्मचारियों के लिए वीजा विस्तार की योजना जटिल हो सकती है। लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि PERM सस्पेंशन से सभी H-1B वीजा स्वतः रद्द हो जाएंगे। वीजा की स्थिति प्रत्येक कर्मचारी के मामले और लागू इमिग्रेशन नियमों पर निर्भर करेगी।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में कहां आ सकती है रुकावट?
रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के सामान्य रास्ते में नियोक्ता पहले PERM प्रमाणन प्राप्त करता है, जहां यह आवश्यक हो। इसके बाद आम तौर पर कर्मचारी के लिए I-140 इमिग्रेंट पिटीशन दाखिल की जाती है। आगे की प्रक्रिया वीजा उपलब्धता, प्राथमिकता तिथि और अन्य पात्रता शर्तों पर निर्भर करती है। यदि नियोक्ता PERM आवेदन दाखिल नहीं कर पाता या उसकी प्रक्रिया रुक जाती है, तो कर्मचारी के स्थायी निवास की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
नौकरी बदलने पर क्या नई परेशानी आएगी?
यदि कोई कर्मचारी दूसरी कंपनी में नौकरी स्वीकार करता है, तो ग्रीन कार्ड प्रायोजन की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, इसका निर्धारण मौजूदा आवेदन की स्थिति और लागू नियमों से होता है। कुछ मामलों में पहले से स्वीकृत I-140 और अन्य शर्तें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए नौकरी बदलने या वीजा की समयसीमा से जुड़ा फैसला लेने से पहले योग्य इमिग्रेशन वकील से सलाह लेना उपयोगी होगा।
भारतीय आईटी पेशेवरों को क्या करना चाहिए?
प्रभावित कर्मचारियों को अपने नियोक्ता से लिखित रूप में केस की स्थिति, PERM आवेदन और I-140 प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। साथ ही H-1B की समाप्ति तिथि, संभावित विस्तार और वैकल्पिक कानूनी विकल्पों पर समय रहते चर्चा करनी चाहिए। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले अमेरिकी श्रम विभाग और इमिग्रेशन अधिकारियों की आधिकारिक सूचनाओं की जांच करना जरूरी है।
Read More : Panama Earthquake: पनामा में 7.7 तीव्रता के भूकंप से तबाही, सुनामी अलर्ट जारी