BNSS Section 163 : राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। एक वीडियो जारी कर उन्होंने पूछा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की घोषणा के बावजूद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश हो रही है।
धारा 163 लगाने के पीछे क्या वजह थी?
कपिल सिब्बल ने कहा कि BNSS की धारा 163 का इस्तेमाल ऐसी परिस्थितियों में किया जाता है, जहां सार्वजनिक शांति भंग होने या किसी संभावित खतरे को रोकने की आवश्यकता हो। उनके मुताबिक, प्रशासन को यदि हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, तो वह कानूनी प्रावधानों के तहत कदम उठा सकता है।
हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि जब प्रदर्शनकारियों ने कई दिन पहले ही दिल्ली आकर शांतिपूर्ण विरोध करने की बात कही थी, तो प्रतिबंधात्मक आदेश लगाने का आधार क्या था। सिब्बल ने कहा कि यदि किसी वर्ग की ओर से खतरे की शिकायत नहीं की गई थी, तो फिर ऐसी पाबंदियां लगाने की जरूरत पर स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पर भी सवाल
सिब्बल ने जंतर-मंतर पहुंचने वाले प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि लोगों को किस कानूनी प्रावधान के तहत गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया और उन्हें कहां ले जाया गया। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बारे में जानकारी उपलब्ध कराना कानून के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे CJP नेताओं को विमान से उतरने के बाद भी हिरासत में लिया गया। सिब्बल ने पूछा कि शांतिपूर्ण विरोध करने की घोषणा करने वाले नेताओं से आखिर किस तरह का खतरा था।
ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया पर लगाए आरोप
कपिल सिब्बल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP नेताओं के प्रदर्शन को रोकने के लिए की गई कार्रवाई के पीछे सत्ता पक्ष की असहजता हो सकती है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को भी उठाया।
सिब्बल ने दावा किया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए। उन्होंने इस संदर्भ में सवाल किया कि प्रभावित लोगों को दोबारा मौका देने की बात क्या पहले हुई गड़बड़ियों को स्वीकार करने के समान है। ये सिब्बल के आरोप हैं; इनकी पुष्टि के लिए संबंधित चुनावी रिकॉर्ड और निर्वाचन आयोग का पक्ष देखना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट, ट्रेन सेवाओं और इंटरनेट पर चिंता
सिब्बल ने दावा किया कि प्रदर्शन से जुड़े प्रतिबंधों के दौरान ट्रेन सेवाओं, इंटरनेट और फोन संपर्क को लेकर भी समस्याएं सामने आईं। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने परिजनों या अन्य व्यक्तियों से संपर्क करने में परेशानी होने की बात चिंताजनक है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट में मुद्दा उठाए जाने के बावजूद कथित प्रतिबंध क्यों जारी रहे।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस तेज
कपिल सिब्बल ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिक अधिकारों का भी ध्यान रखना चाहिए। उनके बयान के बाद धारा 163 के इस्तेमाल, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और संचार व परिवहन प्रतिबंधों को लेकर बहस तेज हो सकती है। इन मामलों की पूरी तस्वीर समझने के लिए दिल्ली पुलिस, प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
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