Green Crackers India : दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल और बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक बार फिर अहम संकेत सामने आए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय संतुलित व्यवस्था पर विचार कर सकती है। पिछले साल की तरह इस बार भी ग्रीन पटाखों की बिक्री और उन्हें निर्धारित समय के भीतर चलाने की अनुमति देने संबंधी निर्देश जारी किए जा सकते हैं। हालांकि, अंतिम आदेश क्या होगा, यह अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
CJI ने कहा, पाबंदी को दंडात्मक कार्रवाई मानते हैं लोग
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि लोग प्रतिबंध को अक्सर दंडात्मक कार्रवाई के रूप में देखते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अभी अदालत के पास ऐसा आदेश तैयार करने के लिए पर्याप्त समय है, जिससे त्योहार मनाने और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सके। अदालत का जोर ऐसी व्यवस्था पर दिखाई दिया, जिसमें लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय भी शामिल हों।
ग्रीन पटाखों और निर्धारित समय पर हो सकता है विचार
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि अदालत पटाखों पर पूर्ण रोक के बजाय नियंत्रित इस्तेमाल के विकल्प पर विचार कर सकती है। पिछले साल अपनाए गए दृष्टिकोण की तरह ग्रीन पटाखों की बिक्री और उन्हें चलाने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने पर विचार संभव है। ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य त्योहार के दौरान पटाखों के इस्तेमाल को नियमों के दायरे में रखना हो सकता है। हालांकि, सुनवाई में दिए गए संकेतों को अंतिम आदेश नहीं माना जाना चाहिए।
पटाखे चलाना धार्मिक अधिकार का हिस्सा है या नहीं?
सुनवाई के दौरान एक वकील ने दलील दी कि पटाखे चलाना धर्म के मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि पूजा करना धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है, लेकिन पटाखे चलाने को उसी श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। अपनी दलील के दौरान उन्होंने टिप्पणी की कि भगवान भी यह देखकर हैरान होंगे। इस तर्क के जरिए अदालत के सामने धार्मिक स्वतंत्रता और पटाखों के इस्तेमाल के बीच अंतर का मुद्दा उठाया गया।
धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती। साथ ही, यह भी देखना जरूरी है कि मौजूदा परिस्थितियों में संतुलित दृष्टिकोण क्या हो सकता है। अदालत का रुख इस बात पर केंद्रित दिखाई दिया कि त्योहारों की परंपराओं और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बीच व्यावहारिक समाधान तलाशा जाए। इस मामले में अंतिम निर्णय लेते समय धार्मिक आस्था, नागरिकों की जिम्मेदारी और प्रदूषण नियंत्रण जैसे पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।
नागरिकों और सिविल सोसायटी से जिम्मेदारी निभाने की अपील
CJI ने यह भी कहा कि यदि नागरिक और सिविल सोसायटी मौजूदा स्थिति के प्रति जागरूक रहें तथा अपनी जिम्मेदारी समझें, तो यह बेहतर होगा। अदालत ने लोगों से त्योहार मनाते समय निर्धारित समय और नियमों का ध्यान रखने की अपील किए जाने की बात कही। इससे संकेत मिलता है कि पटाखों के इस्तेमाल को लेकर केवल कानूनी प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दिवाली से पहले अंतिम आदेश पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब सबकी नजर अदालत के अंतिम आदेश पर है। क्या ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल के लिए समयसीमा तय होगी या कोई अन्य व्यवस्था लागू की जाएगी, इसका फैसला आगे की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल अदालत ने पूर्ण प्रतिबंध के बजाय संतुलित समाधान की संभावना पर संकेत दिया है। इसलिए किसी भी नए नियम को अंतिम आदेश आने के बाद ही निश्चित माना जाना चाहिए।
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