CJP Protest : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में जुट गई है। संगठन के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका सोमवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। यहां उन्होंने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए तारीख और अनुमति देने की मांग की। सीजेपी नेताओं का कहना है कि वे आंदोलन को निर्धारित नियमों के तहत आयोजित करना चाहते हैं और इसके लिए पुलिस से स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
आशुतोष रांका बोले, पुलिस बताए कब कर सकते हैं प्रदर्शन
सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने कहा कि वे दिल्ली पुलिस से यह जानने पहुंचे हैं कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए कौन-सी तारीख निर्धारित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि संगठन पुलिस को मौका दे रहा है कि वह खुद प्रदर्शन की तारीख बताए। रांका के मुताबिक, यदि पुलिस की ओर से कोई तारीख नहीं दी जाती है, तो संगठन आगे की रणनीति पर फैसला करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता पुलिस से अनुमति और प्रदर्शन की तारीख के संबंध में जवाब हासिल करना है।
सौरव दास ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
सीजेपी के दूसरे नेता सौरव दास ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अक्सर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की शिकायतें सामने आती हैं, इसलिए इस बार संगठन ने पुलिस से पहले ही तारीख बताने का अनुरोध किया है। दास के मुताबिक, सीजेपी पुलिस को विकल्प दे रही है कि वह बताए कि प्रदर्शन कब आयोजित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया जाएगा। इसके बाद संगठन अपनी अगली रणनीति तय करेगा। हालांकि, आगे क्या कदम उठाया जाएगा, इसका निर्णय पुलिस की प्रतिक्रिया के बाद लिया जाएगा।
10 अक्टूबर को प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर विवाद
इससे पहले सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। हालांकि, पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। इसके बाद संगठन के तीन प्रमुख चेहरों अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद सीजेपी और पुलिस के बीच प्रदर्शन की अनुमति को लेकर विवाद और गहरा गया। अब संगठन फिर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रदर्शन की तारीख हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
तीन हजार से अधिक समर्थकों को हिरासत में लेने का दावा
सीजेपी के आंदोलन के दौरान संगठन का समर्थन कर रहे तीन हजार से अधिक लोगों को भी दिल्ली में अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद तीनों नेताओं को अगले दिन अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन पर एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त लगाई गई। इस कार्रवाई के बाद भी संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने का संकेत दिया है।
मुंबई और बेंगलुरु में भी कर चुका है प्रदर्शन
दिल्ली से पहले सीजेपी ने मुंबई और बेंगलुरु में भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किए थे। संगठन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराता रहा है। अब जंतर-मंतर पर नए प्रदर्शन की तारीख हासिल करने की कोशिश की जा रही है। सौरव दास और आशुतोष रांका के बयान के बाद दिल्ली पुलिस के जवाब पर नजर रहेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस संगठन को प्रदर्शन के लिए कब तारीख देगी और सीजेपी आगे किस तरह आंदोलन करेगी।
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