Shivraj Singh Chouhan Sehore : मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तूल पकड़ रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। इस कार्रवाई के बाद मामले में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए
यह पूरा मामला सीहोर जिले के कोसमी गांव का है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सोमवार को वन विभाग की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ दिए थे। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान मौके पर पहुंचे तथा पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों की कार्रवाई पर नाराजगी जताई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिवराज सिंह चौहान ने कार्रवाई को बताया अन्याय
शिवराज सिंह चौहान ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनके क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों के वर्षों पुराने घर गिरा दिए गए, फसलें कुचल दी गईं और कुओं को मिट्टी से भर दिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ धरना भी दिया था। शिवराज की नाराजगी के बाद यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया।
विदिशा संसदीय क्षेत्र से जुड़ा है मामला
सीहोर जिला शिवराज सिंह चौहान के विदिशा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। यही वजह है कि घटना की जानकारी मिलते ही उनका मौके पर पहुंचना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने प्रभावित परिवारों की बात सुनी और प्रशासन से कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की मांग की। हालांकि, मामले में वन विभाग का पक्ष भी सामने आया है, जिसके मुताबिक संबंधित जमीन विभाग की है और वहां पौधरोपण किया गया था।
वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने की बताई वजह
वन विभाग का कहना है कि संबंधित भूमि पर पेड़ लगाए गए थे, लेकिन कथित तौर पर पेड़ों को काटकर वहां मकान बना लिए गए। विभाग के अनुसार, प्रभावित लोगों को नोटिस देने के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। दूसरी ओर, शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि करीब एक साल पहले उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत कर आदिवासियों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। अब आयोग के नोटिस के बाद इस मामले में अधिकारियों के जवाब और कार्रवाई पर नजर रहेगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच कराने की बात कही
मामले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है और उन्होंने इसकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार संवेदनशील है और मुख्य सचिव से भी रिपोर्ट मांगी गई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने तीन दिन में जवाब मांगा है। अब जांच और अधिकारियों के जवाब से स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और क्या प्रक्रिया का पालन हुआ था।
Read More : Rahmat Shah Record : रहमत शाह ने कप्तानी डेब्यू पर रचा इतिहास, विराट कोहली के खास रिकॉर्ड की बराबरी की