SIR Voter List : चुनाव आयोग को देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाली प्रमुख संवैधानिक संस्था माना जाता है। हालांकि, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने पर आयोग के फैसले भी चर्चा में आ जाते हैं। पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और संबंधित नियमों को लेकर विवाद के बीच कुछ प्रक्रियाओं में बदलाव और राहत के कदम सामने आए हैं।
पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने का दोबारा मौका
पिछले करीब एक महीने में सामने आए घटनाक्रमों ने मतदाता सूची की प्रक्रिया पर बहस तेज की है। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान सूची से छूट गए पात्र लोगों के नाम जोड़ने का मुद्दा अहम बन गया। फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाता है। ऐसे में पात्र नागरिकों को आवेदन का अवसर मिलना राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन सभी कदमों को आयोग के पुराने फैसलों की वापसी कहना उचित नहीं होगा।
पश्चिम बंगाल में विशेष शिविरों से मिलेगी मदद
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पश्चिम बंगाल के सभी 24 जिला निर्वाचन अधिकारियों ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। इसके तहत राज्य के विभिन्न इलाकों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में लोग अपना नाम जांच सकेंगे, जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और सूची से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सहायता ले सकेंगे।
दिल्ली में 33 लाख विसंगतियों पर कार्रवाई
दिल्ली में SIR के दौरान मतदाता सूची से संबंधित करीब 33 लाख विसंगतियां सामने आने की जानकारी दी गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, इनमें से लगभग 20 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है। कुछ मामलों में मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ी थी, जबकि कुछ का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पा रहा था। शेष मामलों के समाधान के लिए अभियान जारी है। मतदाताओं की सहायता हेतु 18 और 25 अक्टूबर को विशेष शिविर लगाने की योजना है।
फॉर्म-6 के अतिरिक्त घोषणापत्र पर विवाद
SIR के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 आवेदन के साथ अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़े जाने पर विवाद हुआ। इसमें पुरानी मतदाता सूची और परिवार के सदस्यों के नाम से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 5 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 के संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी थी। आयोग ने कहा कि मूल फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR के लिए अलग घोषणापत्र जोड़ा गया था। बाद में SIR पूरा कर चुके राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल से यह अतिरिक्त घोषणापत्र हटा दिया गया।
फॉर्म-7 पर सीमा, नाम हटाने की प्रक्रिया पर निगरानी
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है। आयोग ने इसके इस्तेमाल पर सीमा तय की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, SIR के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 जमा कर सकता है, जबकि सामान्य दिनों में एक महीने में अधिकतम पांच आवेदन की सीमा रखी गई है। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में आवेदन देकर नाम हटवाने के संभावित दुरुपयोग को रोकना है। संबंधित अधिकारियों को आवेदन की जांच करनी होगी और जरूरत पड़ने पर मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा।
नोटिस पाने वालों के घर पहुंचेंगे BLO
26 सितंबर को आयोग ने बताया कि SIR के दौरान रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी के कारण नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सहायता के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटा सकेंगे। दस्तावेज ECINet पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे और मामले पर निर्णय निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) लेंगे। हर मतदाता को कार्यालय बुलाना जरूरी नहीं होगा; जरूरत पड़ने पर सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराई जा सकती है। इन कदमों का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाना और मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।
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