Jantar Mantar Protest Ban : दिल्ली में जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध-प्रदर्शन और धरना देने के प्रमुख स्थलों में शामिल रहा है। अब इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद बढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे नागरिकों के विरोध करने के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए उपयुक्त सार्वजनिक स्थल उपलब्ध होना जरूरी है। हालांकि, प्रशासन की ओर से प्रदर्शन स्थलों में बदलाव के बीच वैकल्पिक स्थान भी निर्धारित किए गए हैं।
सौरव दास और आशुतोष रंका समेत कार्यकर्ता हिरासत में
मंगलवार, 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रवेश करने की कोशिश के दौरान CJP के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे समेत कई कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यकर्ता स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शन करना चाहते थे। पुलिस ने उन्हें रोकने के बाद हिरासत में ले लिया। यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटाने की घोषणा कर चुकी थी। इस कार्रवाई के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के फैसले और प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े नियमों पर सवाल उठाए।
मेहर पारसीचा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
CJP कार्यकर्ता मेहर पारसीचा ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, सार्वजनिक स्थान किसी व्यक्ति या सरकार की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि इनका इस्तेमाल नियमों के दायरे में जनता के लिए भी होना चाहिए। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि नागरिकों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि जंतर-मंतर से प्रदर्शन का दर्जा हटाने के फैसले से लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अवसर सीमित हो सकते हैं।
पुलिस से मुलाकात नहीं होने का भी दावा
पारसीचा ने दावा किया कि पार्टी के प्रतिनिधि नियमानुसार प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस को सूचना देने और अनुमति की प्रक्रिया समझने पहुंचे थे। उनके अनुसार, उन्होंने अधिकारियों को यह भरोसा भी दिया था कि प्रशासन जिस तारीख की अनुमति देगा, उसी दिन प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि, उनका आरोप है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की। इसके बाद जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने की जानकारी सामने आई। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सके।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर कार्रवाई का आरोप
CJP कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई कर रही है। पार्टी ने इस फैसले को लेकर सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा है। हालांकि, यह आरोप पार्टी का पक्ष है और इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, जंतर-मंतर के स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड जैसे वैकल्पिक स्थलों को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किए जाने की खबरें हैं।
आगे क्या होगा?
जंतर-मंतर को लेकर विवाद के बीच अब नजर इस बात पर है कि CJP को प्रदर्शन के लिए कब और किस स्थान पर अनुमति मिलती है। पार्टी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की मांग कर रही है, जबकि प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी है। इस मामले में आगे होने वाली बातचीत और आधिकारिक निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।
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