Amit Shah 2029 Statement : गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदर्शन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। शाह ने गुजरात के नतीजों को आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा था कि गुजरात तो केवल झांकी है, 2029 अभी बाकी है। उनके इस बयान पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी और चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची तथा निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए।
जयराम रमेश ने अमित शाह के बयान पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अमित शाह के बयान की आलोचना की। उन्होंने गृह मंत्री के लिए ‘बड़ी-बड़ी बातें, झांसा और धौंस-पट्टी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। रमेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी 2029 के चुनावों को लेकर पहले से ही तैयारी कर रही है और उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव में धांधली से जुड़े उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान के आधार पर नहीं होती है।
वोट के अधिकार को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
जयराम रमेश ने कहा कि मतदान का संवैधानिक अधिकार जनता की सबसे बड़ी ताकत है। उनके मुताबिक, इसी अधिकार के जरिए मतदाता सरकारों को जवाबदेह बना सकते हैं और चुनाव में अपना फैसला सुना सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में विभिन्न वर्गों के बीच सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है और युवा भी अपनी चिंताओं को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। रमेश ने यह भी कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद मौजूदा सरकार के कार्यकाल से जुड़े मामलों की जांच होनी चाहिए।
पवन खेड़ा ने 2029 के दावे और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बीजेपी के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की मौजूदा स्थिति तक पहुंचने में कई दशक लगे। खेड़ा ने सवाल किया कि जब बीजेपी 2029 में जीत का दावा कर रही है, तो उसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर भी जवाब देना चाहिए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और उनके कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए। खेड़ा ने कहा कि सरकार और चुनाव आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और इस प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए।
इमरान मसूद ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी। मसूद ने मतदाता सूची से कथित तौर पर 13 करोड़ नाम हटाए जाने के दावे का उल्लेख करते हुए कहा कि नाम हटाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी संबंधित लोग घुसपैठिए हैं।
उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में संशोधन की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। उनके मुताबिक, यह स्पष्ट होना चाहिए कि कितने लोगों की पहचान की गई, कितने मामलों में कार्रवाई हुई और कितने लोगों को वास्तव में देश से निर्वासित किया गया। ये आंकड़े कांग्रेस नेताओं के दावों के रूप में सामने आए हैं, जिनकी पुष्टि के लिए आधिकारिक विवरण जरूरी है।
अमित शाह ने गुजरात के नतीजों को 2029 से जोड़ा
दरअसल, अमित शाह ने गुजरात निकाय चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि गुजरात की जनता ने कांग्रेस को अपना फैसला सुना दिया है। शाह के मुताबिक, राहुल गांधी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देश की जनता 2029 के लोकसभा चुनाव में देगी।
बीजेपी के इस बयान के बाद कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर अपनी आपत्तियां दोहराईं। इस तरह गुजरात के निकाय चुनावों से शुरू हुई बहस अब आगामी लोकसभा चुनाव, चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाता सूची की पारदर्शिता जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंच गई है।
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