Chhattisgarh Weather Update : छत्तीसगढ़ में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। अब प्रदेश में एक बार फिर मौसम बदलने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 15 अक्टूबर से कई इलाकों में बादलों की गर्जना के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाएं चलने की भी आशंका है। ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण और द्रोणिका के प्रभाव से मौसम में यह बदलाव देखने को मिल सकता है।
धान की तैयार फसल को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता
मौसम में संभावित बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय प्रदेश के कई इलाकों में धान की फसल पककर तैयार खड़ी है और कटाई का समय नजदीक आ रहा है। दशहरा के बाद हरूना किस्म के धान की कटाई शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में बारिश और तेज हवाएं किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं। खेतों में खड़ी फसल गिरने से कटाई में देरी होने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
रायपुर में सामान्य से अधिक दर्ज हुआ तापमान
राजधानी रायपुर में मंगलवार को अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से एक डिग्री अधिक रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो औसत से करीब डेढ़ डिग्री ज्यादा है। तापमान सामान्य से ऊपर बने रहने के बावजूद प्रदेश में बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम में नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों के बदलाव के चलते बादल सक्रिय हो सकते हैं और गरज-चमक के साथ वर्षा की स्थिति बन सकती है।
अक्टूबर में अब तक 93 प्रतिशत कम बारिश
आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर के शुरुआती 13 दिनों में छत्तीसगढ़ में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में प्रदेश में केवल 2.4 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 35.6 मिलीमीटर होना चाहिए था। इस तरह बारिश में करीब 93 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताए जाने से मौसम का रुख बदल सकता है। किसानों के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है, क्योंकि फसल पकने और कटाई की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है।
बिना तेज हवा की बारिश देर से पकने वाले धान के लिए फायदेमंद
कृषि के लिहाज से अक्टूबर की बारिश का असर धान की किस्म और फसल की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि बारिश हल्की या मध्यम होती है और उसके साथ तेज हवाएं नहीं चलतीं, तो देर से पकने वाली धान की फसल को कुछ लाभ मिल सकता है। इसके विपरीत, जल्दी पकने वाली फसल के लिए इस समय बारिश परेशानी बढ़ा सकती है।
तेज हवाएं चलीं तो खेतों में गिर सकती है फसल
बारिश के साथ तेज हवाएं चलने पर धान के पौधों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और कटाई में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। फिलहाल किसानों की नजर 15 अक्टूबर से संभावित मौसम परिवर्तन पर टिकी है। मौसम की वास्तविक स्थिति के अनुसार ही फसल पर इसका असर स्पष्ट होगा।
Read More : MP IAS Transfer List : मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 11 जिलों में नए कलेक्टर नियुक्त, सुखवीर सिंह बने प्रमुख सचिव