ECI Credibility Controversy : पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने मंगलवार को कहा कि भारत का चुनाव आयोग मौजूदा समय में बड़े विवादों का सामना कर रहा है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से अपील की कि वह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जनता का भरोसा दोबारा हासिल करने के लिए ठोस कदम उठाए। लवासा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विपक्षी दल SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
निष्पक्ष अंपायर से की चुनाव आयोग की तुलना
कोलकाता में नागरिकों के एक सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए अशोक लवासा ने चुनाव की निष्पक्षता समझाने के लिए क्रिकेट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि लोग चुनाव आयोग को कितना निष्पक्ष मानते हैं। उनके मुताबिक, यदि दर्शकों या खिलाड़ियों को अंपायर की निष्पक्षता पर संदेह हो, तो वे जीतने वाली टीम की जीत पर भी सवाल उठाने लगते हैं। लवासा के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग पर जनता का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है।
विवादों के बीच विश्वसनीयता बहाल करने की जरूरत
लवासा ने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग का संवैधानिक और संस्थागत दर्जा बहुत ऊंचा है। इसके बावजूद वर्तमान में आयोग विवादों से घिरा हुआ है और लोग अपनी आपत्तियां लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोग को अपनी विश्वसनीयता और जनता का विश्वास फिर से स्थापित करना चाहिए। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि चुनावी संस्थाओं के प्रति नागरिकों का भरोसा लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
लवासा की टिप्पणियां ऐसे दौर में आई हैं, जब विपक्षी पार्टियां कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। विपक्ष के कुछ नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। हाल के दिनों में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों पर आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
आयुक्तों के बीच मतभेदों पर स्पष्टीकरण का मुद्दा
पूर्व चुनाव आयुक्त ने निर्वाचन आयोग के सदस्यों के बीच कथित मतभेदों से जुड़ी खबरों पर भी टिप्पणी की। लवासा के अनुसार, आयोग की ओर से जारी कुछ प्रेस बयान सवालों का स्पष्ट उत्तर देने के बजाय नए संदेह पैदा करते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में पारदर्शी और स्पष्ट संवाद जरूरी है, ताकि जनता के मन में संस्थागत कामकाज को लेकर अनिश्चितता न बढ़े।
चुनाव आयोग ने प्रक्रिया और आदेशों का किया बचाव
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी कहा है कि उसके आदेश कानूनी रूप से मान्य हैं और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार जारी किए जाते हैं। आयोग के मुताबिक, तीनों चुनाव आयुक्तों और अधिकारियों को चुनाव व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने का अधिकार है। इस तरह, जहां लवासा ने जनता का भरोसा बहाल करने पर जोर दिया है, वहीं आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं और आदेशों की वैधता का बचाव किया है।
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