Pramila Jayapal India SIR : भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चिंता जताई है। उनके बयान के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की खबरें लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों में हो रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा हर देश में जरूरी है।
वोटिंग अधिकारों की तुलना अमेरिकी घटनाक्रम से की
वॉशिंगटन राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली डेमोक्रेटिक सांसद ने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में मतदान अधिकारों को लेकर हुई बहस से की। उन्होंने कहा कि भारत में हो रही घटनाएं उन्हें ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका में मतदान अधिकारों को कमजोर किए जाने की कोशिशों जैसी लगती हैं। जयपाल ने जोर दिया कि भारतीय नागरिकों को भी निष्पक्ष चुनाव और मतदान के अधिकार की सुरक्षा मिलनी चाहिए। उनका यह बयान भारत की मतदाता सूची प्रक्रिया पर एक अमेरिकी सांसद की ओर से आई प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।
करीब 13 करोड़ नाम हटने की खबरों पर चिंता
प्रमिला जयपाल ने विशेष रूप से उन आंकड़ों पर चिंता जताई, जिनमें SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर भारत में राजनीतिक बहस तेज है। विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के कई समूहों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता तथा नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, नाम हटाए जाने की संख्या, अलग-अलग राज्यों की स्थिति और प्रक्रिया के कारणों की पुष्टि आधिकारिक आंकड़ों से की जानी चाहिए।
दिल्ली में CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। इन कार्यक्रमों के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था ने भी जताई चिंता
दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी चिंता व्यक्त की थी। संस्था ने अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करने की अपील की। यह मुद्दा अब भारत की घरेलू राजनीतिक बहस के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है।
लोकतंत्र और मतदान अधिकारों पर बढ़ी बहस
प्रमिला जयपाल के बयान से SIR प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ध्यान मिला है। एक ओर विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी मतदाता सूची की जांच तथा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं इस विषय पर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक आंकड़ों, लागू नियमों और संबंधित अधिकारियों के जवाबों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। फिलहाल, मतदाता सूची में बदलाव और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर चर्चा जारी है।
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