INDIA Bloc Petition : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने एक तरफ 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध और इंटरनेट सेवाएं बंद करने से जुड़ी अवमानना याचिकाओं पर विचार किया। दूसरी ओर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
राहुल गांधी के आचरण पर स्पष्टीकरण मांगा
चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को चुनौती देने वाली विपक्षी नेताओं की संयुक्त याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि याचिका पर नोटिस जारी किया जा रहा है, लेकिन संबंधित व्यक्ति को अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा। याचिका में कुल 13 याचिकाकर्ता बताए गए हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट नहीं किया कि किस याचिकाकर्ता के व्यवहार पर उसे आपत्ति है।
सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश
प्रदर्शन से संबंधित मामलों में वकीलों की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संबंधित घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों, वकीलों और अन्य लोगों को हिरासत में लेने तथा कथित पुलिस दुर्व्यवहार के आरोप उठाए गए हैं। अदालत के निर्देश का उद्देश्य संबंधित घटनाओं के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना है, ताकि सुनवाई के दौरान तथ्यों की जांच की जा सके।
बिना शर्त माफी पर अदालत ने जताई टिप्पणी
10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने अदालत में जवाब दाखिल किए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार की ओर से बिना शर्त माफी भी मांगी गई है। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि हलफनामे देर से प्राप्त हुए हैं। उन्होंने माफी के स्वरूप पर भी सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि दलीलों से यह बिना शर्त माफी के बजाय सशर्त माफी जैसी प्रतीत हो रही है।
हिरासत, मेट्रो प्रतिबंध और इंटरनेट बंद करने का मामला
अवमानना याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पहले के न्यायिक निर्देशों के बावजूद प्रदर्शन के दौरान लोगों की आवाजाही बाधित की गई, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और मेट्रो तथा इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए। वहीं, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में कहा कि कदम संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या रोकने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए उठाए गए थे। पुलिस ने कार्रवाई के पीछे खुफिया सूचनाओं और जमीनी परिस्थितियों का हवाला दिया है।
SIR विवाद में चुनाव आयोग से मांगा जवाब
राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं की याचिका में मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने, SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की शक्तियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित रिकॉर्ड पेश कराने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच सहित कई मांगें रखी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और उसके शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जंतर-मंतर को लेकर भी केंद्र और पुलिस को नोटिस
सुनवाई के दौरान जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई करने की मांग वाली याचिका पर भी केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया गया। अब इन मामलों में संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, नोटिस जारी होने का अर्थ याचिकाओं में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना नहीं है।
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