Albania Protest : अल्बानिया की राजधानी तिराना में गुरुवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर सरकारी इमारतों की खिड़कियों के शीशे तोड़े, कचरे के डिब्बों में आग लगाई, ट्रैफिक लाइटों को नुकसान पहुंचाया और सड़कों पर बैरिकेड खड़े कर दिए। विरोध के कारण राजधानी के कई हिस्सों में यातायात और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रदर्शनकारियों की मांगों और सरकार के रुख को लेकर राजनीतिक तनाव भी बढ़ता दिखाई दिया।
आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दंगा-रोधी पुलिस ने आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल स्कंदरबेग स्क्वायर में पर्यटकों की मौजूदगी के बीच सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया। हिंसक झड़पों के बीच संसद का सत्र स्थगित करना पड़ा। घटनाक्रम ने देश में जारी राजनीतिक असंतोष और सरकार के सामने मौजूद चुनौतियों को एक बार फिर उजागर किया है।
तिराना से दूसरे शहरों तक फैला विरोध
प्रदर्शन केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा। शकोद्रा, दुरेस, एल्बासन, कुक्स और वलोरा जैसे शहरों में भी विरोध प्रदर्शन होने की खबर है। अलग-अलग स्थानों पर लोगों ने सरकार की नीतियों और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में विवादित भूमि परियोजना पर सवाल उठाना और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
जारेड कुशनर से जुड़ी रिसॉर्ट परियोजना पर विवाद
प्रदर्शन का एक प्रमुख कारण अल्बानिया के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित खूबसूरत तटीय जमीन को लेकर विवाद बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह जमीन जारेड कुशनर से जुड़ी एक लक्जरी रिसॉर्ट परियोजना के लिए डेवलपरों को हस्तांतरित किए जाने के मुद्दे पर विरोध का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उनकी जमीन अन्यायपूर्ण तरीके से परियोजना के लिए दी गई। इस मामले ने भूमि अधिकारों, स्थानीय समुदायों की सहमति और विकास परियोजनाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
भ्रष्टाचार और रोजगार को लेकर युवाओं में नाराजगी
प्रदर्शनकारियों की शिकायत केवल जमीन तक सीमित नहीं है। बढ़ती जीवन-यापन लागत और नौकरी पाने में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। कियारा नाम की एक छात्रा ने आरोप लगाया कि बिना प्रभावशाली संपर्कों के योग्यता के आधार पर नौकरी पाना मुश्किल हो गया है। उनके बयान से युवाओं में रोजगार के अवसरों और सरकारी व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर व्याप्त असंतोष का संकेत मिलता है।
प्रधानमंत्री एडी रामा ने इस्तीफे की मांग ठुकराई
प्रधानमंत्री एडी रामा ने इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी जनता की बात सुनना और अल्बानिया को आगे बढ़ाना है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस समय पद छोड़ना देश को यूरोपीय संघ की सदस्यता हासिल करने के ऐतिहासिक अवसर से वंचित कर सकता है।
यूरोपीय संघ ने संवाद की अपील की
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अल्बानिया 2028 तक यूरोपीय संघ का सदस्य बनने की दिशा में आगे बढ़ने वाले देशों में शामिल है। यूरोपीय संघ के मिशन ने सभी पक्षों से हिंसा से बचने और रचनात्मक संवाद शुरू करने की अपील की है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शनों की दिशा पर नजर रहेगी।
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