CJP Tiranga March : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। दिल्ली और मुंबई के बाद अब बेंगलुरु में भी संगठन ने तिरंगा मार्च निकालने की योजना बनाई थी। हालांकि, बेंगलुरु पुलिस ने प्रस्तावित मार्च को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद प्रदर्शन की जगह और विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित नियमों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। आयोजकों के मुताबिक, इस मार्च का उद्देश्य लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना और सीजेपी के नेताओं के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करना था।
टाउन हॉल से क्विट इंडिया मेमोरियल तक प्रस्तावित था मार्च
आयोजकों की योजना के अनुसार, शुक्रवार शाम चार बजे बेंगलुरु के टाउन हॉल से तिरंगा मार्च शुरू होना था। इसके बाद प्रदर्शनकारी भारत छोड़ो आंदोलन स्मारक यानी क्विट इंडिया मेमोरियल तक पहुंचने वाले थे। इस कार्यक्रम को जागृत कर्नाटक, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की कर्नाटक इकाई और ‘माई वोट, माई राइट’ के सहयोग से आयोजित किया जाना था। मार्च के माध्यम से आयोजक चुनावी प्रक्रिया और अपने संगठन से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना चाहते थे।
कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश का पुलिस ने दिया हवाला
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बेंगलुरु पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयोजक टाउन हॉल से मार्च निकालना चाहते थे, जबकि कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार विरोध प्रदर्शनों के लिए फ्रीडम पार्क निर्धारित किया गया है। इसी वजह से प्रस्तावित मार्ग पर मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस का रुख निर्धारित प्रदर्शन स्थल से संबंधित न्यायिक निर्देशों पर आधारित बताया गया है। इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि आयोजक निर्धारित स्थल पर प्रदर्शन करने की योजना बनाते हैं या फिर मार्च के लिए किसी वैकल्पिक व्यवस्था की मांग करते हैं।
आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में आयोजित होना था मार्च
आयोजकों के अनुसार, बेंगलुरु में प्रस्तावित तिरंगा मार्च का एक प्रमुख उद्देश्य सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास के प्रति समर्थन और एकजुटता जाहिर करना था। दोनों नेताओं के खिलाफ दिल्ली में दर्ज कार्रवाई के बाद संगठन से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन तेज किए हैं। सीजेपी विभिन्न स्थानों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी प्रदर्शन आयोजित कर रही है। बेंगलुरु में प्रस्तावित मार्च इसी विरोध अभियान की एक कड़ी था।
जंतर-मंतर मामले में दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आशुतोष रांका और सौरव दास को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उन पर कथित तौर पर शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड की शर्तों का उल्लंघन करने और दिल्ली के जंतर-मंतर में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप लगाए गए। दोनों को तिहाड़ जेल में रखा गया है। इन आरोपों के संदर्भ में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और आरोपों को दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर भी चर्चा
इस घटनाक्रम में जंतर-मंतर का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। दी गई जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर को अब प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। ऐसे में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों के सामने निर्धारित स्थानों और प्रशासनिक अनुमति से जुड़ी चुनौतियां हैं। बेंगलुरु में मार्च की अनुमति नहीं मिलने से भी यह सवाल सामने आया है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए तय नियमों के तहत आयोजक अपनी गतिविधियां किस तरह संचालित कर सकते हैं। कुल मिलाकर, सीजेपी के प्रस्तावित तिरंगा मार्च पर रोक का कारण बेंगलुरु पुलिस ने हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत निर्धारित प्रदर्शन स्थल को बताया है। इस मामले में आगे की स्थिति आयोजकों के अगले कदम और प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगी।
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