Dhruv Rathee Bailable Warrant : यूट्यूबर ध्रुव राठी से जुड़े साल 2018 के कथित आपराधिक मानहानि मामले में दिल्ली की साकेत अदालत ने जमानती वारंट जारी किया है। इस मामले में 17 अक्टूबर को सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और अदालत में चल रही प्रक्रिया के बीच यह आदेश सामने आया है। हालांकि, जमानती वारंट जारी होना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने के बराबर नहीं है। मामले में अंतिम निर्णय अदालत की आगे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
किस शिकायत पर चल रहा है मामला?
यह मामला विकास सांक्रित्यायन, जिन्हें विकास पांडे के नाम से भी जाना जाता है, की ओर से दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ध्रुव राठी के ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ नाम के वीडियो को लेकर आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में वीडियो की सामग्री को लेकर आपत्ति जताई गई थी। फिलहाल, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आने तक इन्हें शिकायतकर्ता के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
साकेत कोर्ट में 17 अक्टूबर को हुई सुनवाई
मामले में 17 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। इससे पहले भी अदालत इस मामले में समन की तामील सुनिश्चित करने को लेकर निर्देश दे चुकी थी। अदालत की प्रक्रिया में समन या वारंट का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है। जमानती वारंट के मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के आदेश और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होती है।
गुरुग्राम स्थित आवास पर समन भेजने की अनुमति
इस मामले में साकेत कोर्ट ने 12 अक्टूबर को पारित आदेश में ध्रुव राठी के गुरुग्राम स्थित आवास पर समन भेजने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की अनुमति दी थी। अदालत ने शिकायतकर्ता को प्रोसेस सर्वर के साथ जाकर समन की तामील कराने की इजाजत भी दी थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति तक अदालत का समन पहुंचाया जा सके।
शिकायतकर्ता पक्ष ने समन की तामील का दावा किया
शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, ध्रुव राठी के गुरुग्राम स्थित आवास पर समन की भौतिक रूप से तामील करा दी गई थी। अदालत में समन की तामील एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक पहलू है, क्योंकि इसके जरिए संबंधित पक्ष को मामले की सुनवाई और अदालत के निर्देशों की जानकारी दी जाती है। हालांकि, समन की तामील और किसी आरोप का साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार ही होगी।
नोटिस पहुंचाने को लेकर पहले भी हुआ था विवाद
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत करने वाले अधिवक्ता सुशांत कुमार ध्रुव राठी के आवास पर नोटिस पहुंचाने गए थे। उन्होंने एक वीडियो में बताया था कि मामला वर्ष 2018 का है। उनके अनुसार, ध्रुव राठी को फोन किया गया था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर नोटिस लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद सोसायटी के सुरक्षा गार्ड की मदद से नोटिस घर के बाहर चस्पा किया गया था। यह विवरण अधिवक्ता की ओर से किए गए दावे पर आधारित है।
अब आगे क्या होगा?
जमानती वारंट जारी होने के बाद मामले में अगली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। अदालत संबंधित पक्ष की उपस्थिति, समन की तामील और मामले की आगे की सुनवाई से जुड़े पहलुओं पर विचार कर सकती है। यह मामला कथित आपराधिक मानहानि की शिकायत से संबंधित है और अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। आगे की स्थिति अदालत के आदेशों और सुनवाई के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
Read More : Neeraj Chopra 2028 Olympics : चोट के बाद नीरज चोपड़ा की वापसी की तैयारी, 2028 ओलंपिक के लिए क्या है खास योजना?