France Protests 2026 : फ्रांस में बढ़ती महंगाई, जीवनयापन के खर्च और स्कूलों की खराब स्थिति के खिलाफ शनिवार को देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। राजधानी पेरिस में हालात उस समय बिगड़ गए, जब कुछ उपद्रवियों ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों में लूटपाट की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।
110 मार्च में जुटे लाखों प्रदर्शनकारी
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, देशभर में लगभग 110 मार्च और रैलियां आयोजित की गईं। इनमें करीब 5.5 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। हालांकि, प्रदर्शन के आयोजकों ने दावा किया कि इन रैलियों में लगभग आठ लाख लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में महंगाई पर नियंत्रण, बेहतर वेतन, पेंशन व्यवस्था में सुधार और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति मजबूत करना शामिल रहा।
पेरिस के रिपब्लिक इलाके में पुलिस से भिड़ंत
राजधानी पेरिस के प्लास दे ला रिपब्लिक इलाके में नकाब और हुडी पहने कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पटाखे, पत्थर और दूसरी वस्तुएं फेंकीं। इसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन चलाया। घटनास्थल पर कारों, साइकिलों और कचरे के डिब्बों से धुआं उठता दिखाई दिया। एक समाचार कियोस्क में आग लगने और कई दुकानों में लूटपाट की खबरें भी सामने आईं। झड़पों में कई लोगों के घायल होने की सूचना मिली।
गिरफ्तारियों को लेकर अलग-अलग आंकड़े
हिंसा और तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने कई शहरों में कार्रवाई की। उपलब्ध विवरणों में गिरफ्तारियों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती जानकारी में कम से कम 272 लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख है, जबकि गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने देशभर में करीब 400 गिरफ्तारियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों पर हमले, सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाने और दुकानों में लूटपाट जैसी घटनाओं पर चिंता जताई।
राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसा की निंदा की
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसक घटनाओं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ करने, सरकारी कार्यालयों और कारोबारों पर हमला करने तथा लूटपाट में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पेरिस में चैंप्स-एलिसी, राष्ट्रपति भवन, संसद और अन्य सरकारी कार्यालयों के आसपास कई मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के छोटे समूहों को सरकारी इमारतों की ओर बढ़ने से रोकने की कोशिश की।
येलो वेस्ट आंदोलन को फिर सक्रिय करने की कोशिश
प्रदर्शनों के दौरान 2018 में शुरू हुए ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन की वापसी के संकेत भी दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर किए गए आह्वान के बाद अलग-अलग क्षेत्रों से लोग सड़कों पर उतरे। पेट्रोल, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने लोगों की नाराजगी को और बढ़ाया है। प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग का मानना है कि महंगाई के मुकाबले आम लोगों की आय और सरकारी सहायता पर्याप्त नहीं है।
छात्रों और मजदूर संगठनों ने भी उठाई आवाज
हिंसा के बीच कई जगहों पर शांतिपूर्ण मार्च भी निकाले गए। प्रदर्शनकारियों ने फ्रांस का राष्ट्रगान गाया, राष्ट्रीय ध्वज लहराए और संगीत के जरिए अपनी बात रखी। सितंबर के मध्य से स्कूलों में तालाबंदी के जरिए विरोध कर रहे छात्र समूहों ने भी लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। प्रमुख मजदूर संगठन सीजीटी ने बेहतर वेतन-पेंशन, कम कीमतों और सार्वजनिक सेवाओं की सुरक्षा की मांग का समर्थन किया।
महंगाई और सरकारी नीतियों पर बढ़ता दबाव
देशव्यापी विरोध ने फ्रांस में बढ़ती महंगाई और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहां बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं, वहीं आगजनी और लूटपाट की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति पर नजर रहेगी।
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