Marco Rubio India Visit : अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी और रणनीतिक साझेदार बताया है। भारत दौरे से पहले उन्होंने भारत की ऊर्जा नीति और रूस से तेल खरीद को लेकर अपनी बात रखी। रुबियो के मुताबिक, भारत ने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके बावजूद भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। इसकी एक वजह वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं की ओर तुरंत रुख करने में आने वाली कठिनाइयां हैं। उनके बयान से स्पष्ट है कि ऊर्जा सहयोग भारत-अमेरिका संबंधों में महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
इस साल दूसरी बार भारत आ रहे हैं अमेरिकी विदेश मंत्री
मार्को रुबियो का यह भारत दौरा इस साल उनकी दूसरी यात्रा है। इससे पहले वे मई में भारत आए थे और 23 से 26 मई तक विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। उस यात्रा के दौरान उन्होंने कोलकाता, आगरा और जयपुर का दौरा करने के बाद दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। इस बार उनका कार्यक्रम मुंबई और गुजरात के जामनगर पर केंद्रित है। भारत यात्रा के दौरान वे वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। ऊर्जा सहयोग, निवेश और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना इस दौरे के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
20 अक्टूबर को एस जयशंकर से होगी मुलाकात
रुबियो 20 अक्टूबर को मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बैठक में व्यापार, ऊर्जा, निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण उभरती तकनीकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रुबियो के जामनगर दौरे के दौरान कारोबारी और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर भी ध्यान रहेगा। ऐसे में इस यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को लेकर नई दिशा मिलने की संभावना पर नजर रहेगी।
रूस से तेल खरीद पर टैरिफ का मुद्दा
भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदना हाल के महीनों में अमेरिका के साथ संबंधों में चर्चा का प्रमुख विषय रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावनाओं ने व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 अक्टूबर को रूस से तेल खरीद के मामले में प्रस्तावित 100 प्रतिशत तक के टैरिफ से संबंधित प्रावधान पर राहत दी गई। हालांकि, इस कदम की कानूनी स्थिति और अवधि को लेकर आधिकारिक विवरण देखना जरूरी है। ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती आपूर्ति भारत के लिए महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
ट्रेड डील पर बातचीत में चुनौतियां बरकरार
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत लंबे समय से जारी है। हालांकि, बाजार तक पहुंच, शुल्क और व्यापारिक रियायतों जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अक्टूबर की शुरुआत में कहा था कि वार्ता एक ऐसे चरण में पहुंच गई है, जहां आगे समझौता करना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने बातचीत में प्रगति की बात भी कही है। इससे संकेत मिलता है कि समझौते को लेकर कुछ मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश जारी है।
रुबियो की यात्रा से क्या उम्मीदें हैं?
मार्को रुबियो की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका व्यापार तथा ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। रूस से तेल खरीद, टैरिफ और व्यापार समझौते पर बातचीत के परिणाम इस दौरे की अहम निगरानी के विषय होंगे। हालांकि, किसी अंतिम समझौते या नीति परिवर्तन की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही की जा सकेगी।
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