CJP Protest : दिल्ली में जारी राजनीतिक और छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने दो सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यदि पांच दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद रविवार को दोनों नेताओं को रिहा नहीं किया गया, तो वह कानूनी कदम उठाएगी। CJP ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सलाह लेने के बाद उसे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह हुआ है। हालांकि, देरी के पीछे जानबूझकर की गई रणनीति के आरोप पार्टी के दावे हैं।
अभिजीत दीपके सशर्त जमानत पर जेल से बाहर
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को सशर्त जमानत मिलने के बाद रिहा कर दिया गया। उन्हें शुक्रवार को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब वह ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने के लिए कनॉट प्लेस की ओर जा रहे थे। अदालत ने जमानत के साथ शांति भंग नहीं करने से जुड़ी शर्त लगाई है। रिहाई के बाद दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि वह अपने भाइयों की आजादी का इंतजार कर रहे हैं। उनके इस संदेश के बाद दोनों नेताओं की रिहाई का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया।
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा भी हिरासत में ली गईं
प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शुक्रवार को हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने और रातभर हिरासत में रखने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बीच छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई को लेकर बहस जारी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के खिलाफ विरोध
CJP के साथ कई छात्र संगठन और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) का विरोध कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर अन्य चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का जिक्र किया गया है। दूसरी ओर, भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों का खंडन किया और कहा कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इस तरह चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर आरोपों और आधिकारिक स्पष्टीकरण के बीच विवाद बना हुआ है।
जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद गिरफ्तारियां
इस सप्ताह मंगलवार को सौरव दास और आशुतोष रांका समेत 14 लोगों ने कथित तौर पर जंतर-मंतर के बंद दरवाजे को पार कर परिसर में प्रवेश किया और वहां तिरंगा फहराया। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे सहित 12 लोगों को रिहा कर दिया गया, जबकि दास और रांका को निरोधात्मक कार्रवाई के तहत पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सुनवाई में देरी का आरोप, रविवार पर टिकी निगाहें
CJP की लीगल अफेयर्स प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि शनिवार को दोपहर दो बजे निर्धारित सुनवाई के लिए जांच अधिकारी शाम छह बजे पहुंचे। पार्टी का दावा है कि इस देरी के कारण दोनों नेताओं की रिहाई नहीं हो सकी। अब उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद अदालत और पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर है। हालांकि, रिहाई की स्थिति और आगे की कानूनी प्रक्रिया की पुष्टि आधिकारिक जानकारी से होनी बाकी है।
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