Voter List Controversy : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार बढ़ रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्षी दलों का INDIA ब्लॉक ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर संसद के दोनों सदनों में नया नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। यह कदम चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बाद उठाया जा रहा है।
लोकसभा और राज्यसभा में दिया जा सकता है नोटिस
रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी दल नए प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं और अगले सप्ताह लोकसभा तथा राज्यसभा में नोटिस दिए जाने की संभावना है। इससे पहले 24 अप्रैल को राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों ने CEC को हटाने की मांग से जुड़ा नोटिस दिया था, जो अभी लंबित बताया गया है। ताजा प्रस्ताव को विपक्षी दलों की ओर से नए तथ्यों और हालिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया जा रहा है।
चुनाव आयोग के भीतर असहमति बनी बड़ा मुद्दा
विपक्ष के इस कदम के पीछे चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और SIR से जुड़े कई मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
मतदाता सूची और SIR को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों पर अपनी असहमति दर्ज कराई और आरोप लगाया कि कुछ कदम उनकी जानकारी या सहमति के बिना उठाए गए। इनमें Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ प्रक्रियाओं को लेकर कानूनी और प्रशासनिक सवाल भी उठाए।
महुआ मोइत्रा ने दर्ज कराई पुलिस शिकायत
इसी विवाद के बीच TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद मार्ग पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप महुआ मोइत्रा और उनकी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं; इनका अंतिम निर्धारण जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगा।
अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी सोशल मीडिया मंच X पर चुनाव आयोग से जुड़े एक कथित व्हाट्सऐप स्क्रीनशॉट का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, इस सामग्री से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कथित योजना का संकेत मिलता है। हालांकि, स्क्रीनशॉट की स्वतंत्र पुष्टि और उसके संदर्भ को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
30 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि कथित व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए करीब 30 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की योजना पर चर्चा हुई। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांगने की बात कही। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं हुई है, इसलिए इन्हें अभिषेक बनर्जी के दावे के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना उचित है।
चुनाव आयोग ने निर्णयों को सर्वसम्मत बताया
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने हालिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि संस्थागत विचार-विमर्श में अलग-अलग राय सामने आना असामान्य नहीं है और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के इस पक्ष के मुताबिक, आंतरिक टिप्पणियों या आपत्तियों को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR विवाद से बढ़ी राजनीतिक खींचतान
SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच पहले से राजनीतिक बहस चल रही है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में अपीलें भी सामने आई हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने पुनर्बहाली के लिए अपील की है।
संसद में नए प्रस्ताव पर सबकी नजर
अब विपक्षी दलों की ओर से प्रस्तावित नए नोटिस और महुआ मोइत्रा की पुलिस शिकायत के बाद CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद संसद और सार्वजनिक बहस दोनों में और प्रमुख हो सकता है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं आयोग अपने फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया और सर्वसम्मति का परिणाम बता रहा है। आने वाले दिनों में संसद में प्रस्ताव और संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं इस विवाद की अगली दिशा तय करेंगी।
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