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Afghanistan Earthquake: अफगानिस्तान में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 4.1 तीव्रता

Afghanistan Earthquake: युद्ध और मानवीय संकटों से जूझ रहे अफगानिस्तान में प्रकृति का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय निवासियों में अफरा-तफरी मच गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 मापी गई है। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में जान-माल के किसी बड़े नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली है, लेकिन बार-बार आ रहे इन झटकों ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है।

Afghanistan Earthquake: 10 किलोमीटर की गहराई पर था केंद्र, झटकों का बढ़ा खतरा

भूकंप की सबसे चिंताजनक बात इसका केंद्र और गहराई रही। एनसीएस (NCS) के अनुसार, यह भूकंप जमीन से मात्र 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया था। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि जब भूकंप का केंद्र सतह के इतने करीब होता है, तो झटकों का प्रभाव अधिक महसूस होता है और इससे संरचनात्मक नुकसान की संभावना भी बढ़ जाती है। ‘उथले भूकंप’ (Shallow Earthquake) होने के कारण ही आसपास के इलाकों में आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) आने का खतरा भी काफी ज्यादा बना रहता है।

Afghanistan Earthquake: स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की बढ़ी चिंता

भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। अफगानिस्तान का भौगोलिक क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यह ‘यूरेशियन’ और ‘इंडियन’ टेक्टोनिक प्लेट्स के मिलन स्थल के करीब स्थित है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र ने कई विनाशकारी भूकंपों का सामना किया है, जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई है। वर्तमान झटकों के बाद, लोगों को सलाह दी गई है कि वे जर्जर इमारतों से दूर रहें और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें।

आफ्टरशॉक्स का डर: सुरक्षा के लिए खुले मैदानों में पहुंचे नागरिक

4.1 तीव्रता के इस भूकंप के बाद स्थानीय लोगों में भारी डर देखा जा रहा है। झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलकर खुले मैदानों की ओर भागने लगे। विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य झटके के बाद आने वाले छोटे झटके (Aftershocks) कमजोर पड़ चुकी इमारतों के लिए घातक साबित हो सकते हैं। विशेष रूप से अफगानिस्तान के ग्रामीण इलाकों में, जहाँ घर मिट्टी और कच्चे पत्थरों से बने होते हैं, वहां कम तीव्रता का भूकंप भी बड़ी तबाही ला सकता है।

क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक और भू-गर्भ शास्त्री?

एनसीएस के वैज्ञानिक लगातार क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। अफगानिस्तान में भूकंपीय गतिविधियों की आवृत्ति हाल के महीनों में बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि टेक्टोनिक प्लेटों के बीच बन रहे दबाव के कारण ऐसे छोटे और मध्यम तीव्रता के झटके बार-बार देखने को मिल रहे हैं। आने वाले 24 से 48 घंटे सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस दौरान और भी झटके महसूस किए जा सकते हैं।

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