Surguja National Lok Adalat
Surguja National Lok Adalat : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) नई दिल्ली और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, शनिवार को सरगुजा जिले में नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कुशल मार्गदर्शन में 14 मार्च 2026 को जिला मुख्यालय अंबिकापुर सहित जिले के सभी अधीनस्थ न्यायालयों में लोक अदालत की कार्यवाही संपन्न हुई। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों के बीच लंबे समय से चल रहे विवादों को आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर सुलझाकर उन्हें त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करना था। सुबह से ही न्यायालय परिसरों में पक्षकारों और अधिवक्ताओं की भारी भीड़ देखी गई।
इस नेशनल लोक अदालत की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही दिन में हजारों की संख्या में मामलों का निराकरण किया गया। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अंबिकापुर और सीतापुर न्यायालयों में करीब 3,700 से अधिक लंबित प्रकरणों को आपसी समझौते से बंद किया गया। न्यायिक प्रकरणों के साथ-साथ राजस्व न्यायालयों में भी सक्रियता देखी गई, जहाँ 4,200 से अधिक मामलों का समाधान हुआ। इसके अतिरिक्त, किशोर न्याय बोर्ड के 39 और परिवार न्यायालय के 12 संवेदनशील मामलों में भी सुलह कराई गई। प्री-लिटिगेशन स्तर पर भी बड़ी संख्या में केस सुलझाए गए, जिससे वे भविष्य में जटिल अदालती कार्यवाही का हिस्सा बनने से बच गए।
लोक अदालत के दौरान एक अत्यंत संवेदनशील मोटर दुर्घटना मामले का निराकरण चर्चा का विषय रहा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.एल. चरयाणी की खंडपीठ में एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों द्वारा दायर 74 लाख 10 हजार रुपये के क्षतिपूर्ति दावे पर सुनवाई हुई। लोक अदालत के हस्तक्षेप और बीमा कंपनी की सहमति के बाद 23 लाख रुपये के मुआवजे पर समझौता हुआ। अदालत ने यह राशि 45 दिनों के भीतर जमा करने का आदेश दिया। विशेष बात यह रही कि यह प्रकरण मात्र 4 माह और 11 दिन के भीतर सुलझ गया, जिससे मृतक के वृद्ध माता-पिता और उसकी दो वर्षीय मासूम पुत्री को समय पर आर्थिक संबल मिल सका।
त्वरित न्याय के साथ-साथ पुराने मामलों को खत्म करने पर भी विशेष जोर दिया गया। द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश तिवारी की खंडपीठ ने लगभग पांच वर्ष से लंबित एक पुराने मोटर दुर्घटना मामले को आपसी सहमति से समाप्त कराया। वहीं, चेक बाउंस के पुराने मुकदमों में भी बड़ी सफलता मिली। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पल्लव रघुवंशी की खंडपीठ ने पांच वर्ष पुराने चेक अनादरण मामले को सुलझाया, जबकि न्यायिक दंडाधिकारी श्रीमती कल्पना भगत ने रिकॉर्ड आठ वर्ष से लंबित चेक बाउंस मामले का समाधान कर पक्षकारों को कानूनी उलझनों से हमेशा के लिए आजाद कर दिया।
नेशनल लोक अदालत आज के समय में न्याय प्रणाली का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया से न केवल न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होता है, बल्कि आम नागरिकों को भी वकील की भारी फीस और वर्षों की तारीखों से निजात मिलती है। लोक अदालत के माध्यम से होने वाले समझौतों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें किसी पक्ष की हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष विजयी भाव के साथ घर लौटते हैं। सरगुजा जिले में मिली यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि लोग अब कानूनी दांव-पेंच के बजाय आपसी सहमति से विवादों को सुलझाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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