Afghanistan winter storm
Afghanistan winter storm: अफगानिस्तान इस समय अपनी सबसे भीषण सर्दियों में से एक का सामना कर रहा है। पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और भारी बर्फबारी ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल जनजीवन को ठप्प कर दिया है, बल्कि चारों ओर तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। अफगानिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मौसम का यह उग्र रूप पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ रहा है। कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे गिरते तापमान ने अफगानी नागरिकों के सामने जीवन और मृत्यु का संकट खड़ा कर दिया है।
अफगानिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ANDMA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 72 घंटों में हुई प्राकृतिक घटनाओं में अब तक 61 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इस आपदा में 110 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में लगभग 458 घर या तो पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं या उन्हें आंशिक रूप से क्षति पहुँची है। मौतों का मुख्य कारण कमजोर मिट्टी के घरों की छतों का गिरना और पहाड़ी इलाकों में आए भीषण हिमस्खलन (Avalanche) को बताया जा रहा है।
मौसम की सबसे भीषण मार मध्य और उत्तरी प्रांतों में पड़ी है। दक्षिणी प्रांत कंधार से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ एक पुराने घर की छत गिरने से एक ही परिवार के छह मासूम बच्चों की जान चली गई। बुधवार से शुक्रवार के बीच हुए इन हादसों ने यह साबित कर दिया है कि अफगानिस्तान का बुनियादी ढांचा इस तरह की आपदाओं को झेलने के लिए तैयार नहीं है। भीषण ठंड और पर्याप्त हीटिंग सुविधाओं के अभाव में कई बुजुर्गों और बच्चों ने दम तोड़ दिया है, जिससे मानवीय संकट और भी गहरा गया है।
भारी बर्फबारी ने देश के परिवहन और ऊर्जा तंत्र की कमर तोड़ दी है। राजधानी काबुल को उत्तरी प्रांतों से जोड़ने वाला ‘सालंग हाईवे’, जो देश की मुख्य जीवनरेखा माना जाता है, उसे सुरक्षा कारणों से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही, उज्बेकिस्तान से आने वाली मुख्य बिजली ट्रांसमिशन लाइन के क्षतिग्रस्त होने से अफगानिस्तान के 12 प्रमुख प्रांतों में बिजली गुल हो गई है। तकनीकी टीमें मरम्मत के लिए तैयार खड़ी हैं, लेकिन सड़कों पर जमी कई फीट बर्फ और खराब दृश्यता के कारण वे मौके पर पहुँचने में असमर्थ हैं।
विभिन्न पहाड़ी दर्रों और राजमार्गों पर फंसे यात्रियों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। बामियान जैसे दुर्गम प्रांतों में फंसे लोगों के पास खाने-पीने और ठंड से बचने के साधनों की भारी कमी है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने कुछ क्षेत्रों में भोजन सामग्री और कंबल वितरित किए हैं, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। प्रशासन ने सख्त हिदायत जारी की है कि जब तक मौसम साफ न हो जाए, नागरिक पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान की 4 करोड़ की आबादी में से आधे से ज्यादा लोग इस साल दाने-दाने को मोहताज हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी कटौती और तालिबान शासन के तहत आने वाली प्रशासनिक चुनौतियों ने नागरिकों की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है। काबुल टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि आपदा प्रबंधन की तैयारी समय रहते पुख्ता की गई होती, तो इस प्राकृतिक घटना को इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी बनने से रोका जा सकता था।
Congo New Government : अफ्रीकी देश कांगो गणराज्य में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय की शुरुआत…
Iran Crypto Freeze Trump : मध्य-पूर्व में युद्ध की लपटों को शांत करने के लिए…
Jeffrey Sachs World War 3 : दुनियाभर में अपनी सटीक भविष्यवाणियों के लिए प्रसिद्ध बुल्गारियाई…
West Bengal Election : लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद राहुल…
Vaibhav Suryavanshi Century : क्रिकेट जगत को एक नया 'वंडर किड' मिल गया है। महज…
Kolkata Slum Fire : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले से शनिवार को एक…
This website uses cookies.