Jeffrey Sachs World War 3
Jeffrey Sachs World War 3 : दुनियाभर में अपनी सटीक भविष्यवाणियों के लिए प्रसिद्ध बुल्गारियाई ज्योतिषी बाबा वांगा की चेतावनियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। 9/11 हमलों और चीन के उदय जैसी घटनाओं की भविष्यवाणी करने वाली बाबा वांगा ने 2026 को लेकर जो संकेत दिए हैं, वे वर्तमान वैश्विक हालातों से मेल खाते दिख रहे हैं। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती तल्खी ने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम वास्तव में एक महायुद्ध की ओर बढ़ रहे हैं।
‘बाल्कन के नोस्ट्राडेम्स’ कही जाने वाली बाबा वांगा के अनुसार, साल 2026 में मानवता का सामना पहली बार अलौकिक प्राणियों (एलियंस) से हो सकता है। उनकी भविष्यवाणियों के मुताबिक, यह संपर्क दुनिया के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने इसी वर्ष तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत का भी संकेत दिया था। हालांकि, उन्होंने यह भी सांत्वना दी है कि इस युद्ध से मानवता का पूर्ण विनाश नहीं होगा, क्योंकि दुनिया का आधिकारिक अंत उनके अनुसार साल 5079 में होना तय है।
प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने बाबा वांगा की चेतावनियों को एक तरह से कूटनीतिक आधार दिया है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सैक्स के अनुसार, यदि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया, तो यह अनियंत्रित होकर विश्व युद्ध का रूप ले सकता है। उन्होंने पत्रकार टकर कार्लसन को दिए साक्षात्कार में कहा कि ईरान के पास अब खाड़ी क्षेत्र और इजरायल को दहलाने वाली मिसाइल क्षमता है। यदि तेहरान पर बमबारी होती है, तो वह खाड़ी के तेल क्षेत्रों, बंदरगाहों और गैस संयंत्रों पर ऐसा जवाबी हमला करेगा जिसे रोकना वर्तमान मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए कठिन होगा।
वैश्विक शांति की उम्मीदों को तब बड़ा झटका लगा जब यूरोपीय संघ ने यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो (105 अरब डॉलर) के विशाल लोन पैकेज को मंजूरी दे दी। हंगरी द्वारा वीटो हटाए जाने के बाद मिली इस मंजूरी का राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्वागत किया है। इस पैसे का उपयोग रूस के खिलाफ सैन्य शक्ति बढ़ाने में होगा, जिससे शांति वार्ता की संभावनाएं क्षीण हो गई हैं। एक तरफ ट्रंप और पुतिन के बीच बढ़ती नजदीकी की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ ट्रंप के नाटो छोड़ने की धमकियों ने अमेरिका और यूरोप के बीच दूरियां बढ़ा दी हैं। ऐसे में रूस और यूरोप के बीच सीधे सैन्य टकराव का खतरा बढ़ गया है।
एशियाई मोर्चे पर भी हालात सामान्य नहीं हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की एक समिति ने चीन की उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक तक पहुँच को रोकने के लिए 20 नए निर्यात नियंत्रण उपायों को मंजूरी दी है। ‘मैच एक्ट’ जैसे प्रस्तावों का उद्देश्य चीन को तकनीकी रूप से अलग-थलग करना है। रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइकल बॉमगार्टनर का मानना है कि चीन उन तकनीकों पर कब्जा करना चाहता है जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इस बढ़ते व्यापारिक और तकनीकी युद्ध के कारण ताइवान का मुद्दा आने वाले समय में और अधिक विस्फोटक हो सकता है।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को देखें तो बाबा वांगा की भविष्यवाणियां केवल अंधविश्वास नहीं लगतीं। चाहे वह खाड़ी देशों में ईरान की मिसाइलें हों, यूरोप में रूस का बढ़ता प्रभाव हो या प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य महत्वाकांक्षा—हर तरफ युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। कूटनीतिक प्रयास और अंतरराष्ट्रीय मंच यदि विफल रहते हैं, तो 2026 वास्तव में इतिहास का सबसे काला वर्ष साबित हो सकता है। अब यह वैश्विक नेतृत्व पर निर्भर करता है कि वे संवाद का रास्ता चुनते हैं या विनाश का।
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