Ahmad al-Rahawi Death : इजरायल के हमले में यमन के प्रधानमंत्री अहमद-अल-रहावी की मौत: 10 अगस्त 2024 से हूती विद्रोहियों के नेतृत्व वाली सरकार के प्रधानमंत्री रहे अहमद अल-रहावी की इजरायल के एक एयर स्ट्राइक में मौत हो गई। यमन की राजधानी सना में उनके घर पर यह हमले हुए, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण सरकारी अधिकारी भी मारे गए। यह घटना हूती विद्रोहियों के लिए एक बड़ी राजनीतिक क्षति साबित हुई है।

अहमद-अल-रहावी: एक राजनीतिक नेता
अहमद अल-रहावी का जन्म यमन के अबयान प्रांत के खानफर जिले में हुआ था। उनका पूरा नाम अहमद गालिब नासिर अल-रहावी अल-याफी था। वह यमन में एक प्रमुख नेता थे और जनरल पीपुल्स कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए थे। उनके पिता, गालिब नासिर अल-रहावी, भी यमन के एक प्रमुख नेता थे, जिनकी 1970 में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद, अहमद ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

2005 से 2015 तक अहमद अल-रहावी ने विभिन्न उच्च-स्तरीय सरकारी पदों पर कार्य किया, जैसे कि खानफर जिले के स्थानीय परिषद के अध्यक्ष, अल महवित और अबयान प्रांत के उप-राज्यपाल। 2015 में अल कायदा द्वारा उनके घर पर हमले के बाद, वह यमन की राजधानी सना में शिफ्ट हो गए।
प्रधानमंत्री बनने के बाद अहमद अल-रहावी की भूमिका
अहमद अल-रहावी को 2019 में हूती विद्रोहियों के सर्वोच्च राजनीतिक परिषद में शामिल किया गया। इसके बाद, 10 अगस्त 2024 को उन्हें हूती विद्रोहियों की सरकार का प्रधानमंत्री चुना गया। उनके नेतृत्व में, हूती सरकार ने कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना किया, जिसमें इजरायल और सऊदी अरब द्वारा लगातार दबाव भी शामिल था।
इजरायल का हमला और उसके परिणाम
यह हमला उस समय हुआ, जब हूती सरकार के वरिष्ठ अधिकारी अपने एक साल के कार्यकाल की समीक्षा करने के लिए एक वर्कशॉप में भाग ले रहे थे। इजरायल की वायु सेना ने इस मौके का फायदा उठाकर एयर स्ट्राइक की। इस हमले में अहमद अल-रहावी के साथ-साथ हूती सरकार के रक्षा मंत्री मोहम्मद अल अती और सेना प्रमुख मोहम्मद अब्द अल करीम भी मारे गए। इस हमले के बाद, हूती विद्रोहियों ने इजरायल को कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे एक धोखेबाज़ और क्रूर कार्य करार दिया।
हूती विद्रोह और इजरायल के बीच तनाव
हूती विद्रोह यमन के उत्तरी हिस्से से शुरू हुआ था और इसे गृहयुद्ध या सदाह युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। यह विद्रोह शिया जैदी सम्प्रदाय के धर्मगुरू हुसैन बद्द्रुद्दीन अल-हूती ने शुरू किया था। विद्रोह के परिणामस्वरूप, हूती विद्रोहियों ने यमन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। हूती विद्रोही समूह, जिसे हमास, हिजबुल्लाह, और ईरान द्वारा समर्थित माना जाता है, इजरायल के खिलाफ सक्रिय रहे हैं। हाल के वर्षों में, हूती विद्रोहियों ने इजरायल के मालवाहक जहाजों पर हमले किए थे, जिसे उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन में अपनी एकजुटता दिखाने के तौर पर प्रस्तुत किया।
अहमद अल-रहावी की मौत ने यमन के लिए एक नया संकट पैदा किया है, जिसमें हूती विद्रोहियों को न केवल राजनीतिक बल्कि सैन्य रूप से भी एक बड़ा धक्का लगा है। इजरायल और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है, और यह पूरी क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करने की संभावना रखता है।
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