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AI Layoffs News : एआई क्रांति से लाखों नौकरियां खत्म, जानिए क्या है आपके भविष्य का पूरा गणित

AI Layoffs News : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल भविष्य की तकनीक या चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक श्रम बाजार के लिए एक वास्तविक और गंभीर संकट बन चुका है. साल 2023 से लेकर अब तक दुनिया भर में करीब 1 लाख से 1 लाख 20 हजार कॉर्पोरेट नौकरियां सीधे तौर पर एआई एकीकरण और संगठनात्मक पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चरिंग) के कारण खत्म हो चुकी हैं. बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने परिचालन खर्चों को कम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए एआई टूल्स को प्राथमिकता दे रही हैं. इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर छंटनी का दौर चल रहा है. अमेजन, मेटा और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों द्वारा पिछले 2-3 वर्षों में की गई कटौती यह साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में वैश्विक वर्कफोर्स में एक अभूतपूर्व फेरबदल होने वाला है.

वैश्विक टेक दिग्गजों में छंटनी का दौर जारी, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ा ध्यान

दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी और कॉर्पोरेट कंपनियों ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने के लिए अपने मौजूदा मानव संसाधनों में भारी कटौती की है. आउटप्लेसमेंट फर्म ‘चैलेंजर, ग्रे एंड क्रिसमस’ के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 के बाद से कॉर्पोरेट जगत में हुई लगभग 1 लाख कटौतियों के पीछे सीधे तौर पर एआई जिम्मेदार है. अमेजन, मेटा और ब्लॉक जैसी कंपनियों ने अपने वर्कफोर्स को काफी छोटा कर लिया है. ये कंपनियां अब प्रशासनिक, क्लर्क और आईटी सपोर्ट जैसे विभागों में मैनपावर को कम करके पूरी तरह से एआई-संचालित मॉडल्स की तरफ शिफ्ट हो रही हैं.

इस बदलाव के तहत भारत की दिग्गज आईटी कंपनी टीसीएस (TCS) ने ऑटोमेशन और को-पायलट्स की मदद से एंट्री-लेवल हायरिंग घटाते हुए अपने वर्कफोर्स से 20,000 से अधिक कर्मचारियों को कम किया है. इसी तरह माइक्रोसॉफ्ट ने एआई पाइपलाइन पर फोकस करने के लिए 15,000, अमेजन ने 14,000 और मेटा ने अपने इंटरनल एआई टूल्स को विकसित करने के लिए 7,000 से 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की है. सिस्को ने एआई-आधारित ऑपरेशन्स के लिए 4,000, सेल्सफोर्स ने कस्टमर सपोर्ट एआई पर शिफ्ट होने के कारण 4,000 और वर्कडे ने 1,750 (8.5%) कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया. छोटे और मिड-लेवल स्टार्टअप्स जैसे इन्नोवेसर (340), क्रिप्टो एक्सचेंज क्रैकेन (150) और ड्यून एनालिटिक्स (25% स्टाफ) ने भी एआई की कार्यकुशलता का हवाला देकर बड़े पैमाने पर छंटनी की है.

भारतीय आईटी सेक्टर पर मंडराया गंभीर संकट, बदला पारंपरिक बिजनेस मॉडल

भारतीय आईटी उद्योग, जो कभी देश के लाखों युवाओं के लिए रोजगार का सबसे बड़ा जरिया हुआ करता था, इस समय एआई के कारण एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है. कॉग्निजेंट और टीसीएस जैसी शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों ने अपने पारंपरिक बिजनेस मॉडल में व्यापक बदलाव शुरू कर दिए हैं. कॉग्निजेंट ने अपने ‘प्रोजेक्ट लीप’ के तहत लाखों डॉलर की बचत करने के लिए पुराने और बार-बार दोहराए जाने वाले (रिपिटेटिव) पदों को पूरी तरह खत्म करना शुरू कर दिया है. वहीं दूसरी ओर, देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टीसीएस ने कॉलेजों से होने वाली पारंपरिक ‘मास कैंपस हायरिंग’ में 50 प्रतिशत से अधिक की भारी कटौती की है. अब भारतीय आईटी कंपनियां हेडकाउंट (कर्मचारियों की संख्या) बढ़ाने के बजाय पूरी तरह से प्रोजेक्ट के नतीजों और एआई-संचालित कार्यकुशलता पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं.

इनक्टिव और नियम-आधारित सेक्टर्स पर एआई और ऑटोमेशन का सबसे ज्यादा असर

एआई और ऑटोमेशन के इस दौर में सबसे ज्यादा जोखिम उन नौकरियों पर है जो हर दिन एक तय ढर्रे या नियमों पर आधारित होती हैं. कस्टमर सपोर्ट, डेटा एंट्री, बेसिक सेक्रेटेरियल और फ्रंट डेस्क जैसी भूमिकाओं पर उन्नत एआई एजेंट्स और चैटबॉट्स ने पूरी तरह कब्जा करना शुरू कर दिया है. बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है; उदाहरण के लिए स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने अपने बैक ऑफिस और ह्यूमन रिसोर्स (HR) जैसे विभागों में इंसानों की जगह चैटबॉट्स को तैनात कर दिया है. इसके अतिरिक्त, जूनियर टेक रोल्स और शुरुआती स्तर की कोडिंग करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की मांग भी तेजी से घटी है, क्योंकि एआई कोडिंग असिस्टेंस अब कुछ ही सेकेंड्स में बेसिक कोड लिखने और टेस्टिंग का काम सटीकता से पूरा कर देते हैं.

साल 2030 तक का डरावना अनुमान: करोड़ों नौकरियों पर मंडरा रहा है खतरा

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) और मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक संस्थाओं के हालिया अनुमान बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले हैं. इन रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2030 तक दुनिया भर में करीब 9.2 करोड़ से लेकर 30 करोड़ नौकरियां एआई और ऑटोमेशन के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकती हैं. अकेले अमेरिका में फॉरेस्टर के अनुमान के मुताबिक, 1 करोड़ से अधिक नौकरियां हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं, जो वहां के कुल कार्यबल का 6.1 प्रतिशत है. यूरोप में भी मॉर्गन स्टेनली ने लाखों नौकरियां जाने की आशंका जताई है. यदि भारत की बात करें, तो यहां भी लगभग 1.8 करोड़ नौकरियां एआई ऑटोमेशन के दायरे में आ सकती हैं, जिसके कारण 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को अपना पुराना काम छोड़कर पूरी तरह से नए काम की री-स्किलिंग और ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी.

रणनीतिक और मानवीय संवेदनाओं वाले इन क्षेत्रों में सुरक्षित रहेगी इंसानों की जरूरत

भले ही एआई बहुत सी पारंपरिक नौकरियों को तेजी से खत्म कर रहा है, लेकिन कुछ ऐसे विशिष्ट क्षेत्र भी हैं जहां इंसानी दिमाग, रचनात्मकता और संवेदनशीलता का कोई विकल्प नहीं है. क्रिएटिव फील्ड, लीडरशिप, चेंज मैनेजमेंट, कूटनीति और जटिल रणनीतिक पदों पर एआई का कोई खास असर नहीं होने वाला है. इसके साथ ही, उच्च शारीरिक कुशलता और ऑन-साइट निर्णय लेने वाले काम जैसे प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और मानवीय संवेदनाओं व सहानुभूति से जुड़े क्षेत्र जैसे टीचिंग, साइकोलॉजी और नर्सिंग पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे. तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि इस बड़े बदलाव के दौर में केवल वही लोग टिक पाएंगे जो समय के साथ खुद को अपग्रेड करेंगे, क्योंकि आने वाले समय में पारंपरिक कर्मचारियों की जगह एआई टूल्स को कुशलता से ऑपरेट करने वाले एक्सपर्ट्स की मांग सबसे अधिक होगी.

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