AI Job Loss Warning
AI Job Loss Warning: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल कल्पना या फिल्मों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर दफ्तर के जटिल कार्यों तक, हम एआई पर अपनी निर्भरता बढ़ाते जा रहे हैं। लेकिन इस तकनीकी क्रांति के साथ एक गहरा काला साया भी जुड़ा है—नौकरियों के खत्म होने का डर। शुरुआत से ही यह अंदेशा जताया जा रहा था कि एआई इंसानों को रिप्लेस कर देगा, और अब दुनिया के जाने-माने एआई रिसर्चर डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने इस डर को एक भयावह चेतावनी में बदल दिया है। उनका दावा है कि अगले पांच वर्षों में किसी भी प्रकार के शारीरिक श्रम (Physical Labor) को पूरी तरह से ऑटोमेट किया जा सकता है।
लुइसविले यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और कंप्यूटर साइंटिस्ट डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने हाल ही में एक इंटरव्यू में वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाली बात कही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि महज एक साल के भीतर एआई इंसानों की 99 फीसदी नौकरियां ‘खा’ सकता है। डॉ. रोमन के अनुसार, इस दशक के अंत तक रोजगार की परिभाषा पूरी तरह बदल जाएगी। वे कहते हैं, “मुझे आज कोई भी ऐसा इंसानी काम दिखाई नहीं दे रहा, जिसे मशीनें या सॉफ्टवेयर बेहतर और तेजी से नहीं कर सकते।” यह चेतावनी उन लोगों के लिए खतरे की घंटी है जो यह मानते थे कि एआई केवल रचनात्मक या डेटा से जुड़े कार्यों तक सीमित रहेगा।
‘द डायरी ऑफ ए CEO’ कार्यक्रम में स्टीवन बार्टलेट से बात करते हुए डॉ. याम्पोल्स्की ने ‘टेक्नोलॉजिकल सिंगुलैरिटी’ का जिक्र किया। उनके अनुसार, साल 2045 तक दुनिया एक ऐसे बिंदु पर पहुँच जाएगी, जहाँ से पीछे मुड़ना असंभव होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) और ऑटोमेशन के विस्तार से आने वाले बदलाव पिछले किसी भी औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) से बिल्कुल अलग और कहीं अधिक तीव्र होंगे। यह बदलाव केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सफेदपोश (White Collar) नौकरियों से लेकर जटिल इंजीनियरिंग कार्यों तक सब कुछ एआई के नियंत्रण में होगा।
डॉ. याम्पोल्स्की का मानना है कि आने वाला समय भयंकर बेरोजगारी लेकर आएगा। वे कहते हैं, “मैं यहाँ 10 या 20 प्रतिशत बेरोजगारी की बात नहीं कर रहा हूँ। हम उस स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ 99 से 100 प्रतिशत इंसानी काम मशीनों द्वारा किया जाएगा।” लातविया के रहने वाले इस कंप्यूटर साइंटिस्ट ने एआई सुरक्षा और जोखिमों पर 100 से ज्यादा शोध पत्र लिखे हैं, जिससे उनकी बातों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। उनके अनुसार, मशीनों की कार्यक्षमता और लागत इंसानों के मुकाबले इतनी कम होगी कि कंपनियां फिजिकल लेबर को पूरी तरह बंद कर देंगी।
जब डॉ. याम्पोल्स्की से पूछा गया कि क्या कोई भी नौकरी बचेगी, तो उन्होंने एक दिलचस्प तर्क दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में केवल वही नौकरियां सुरक्षित रहेंगी, जहाँ कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे ‘इंसान’ से सेवा लेना चाहेगा। उदाहरण के लिए, भले ही एआई गणितीय गणनाओं में श्रेष्ठ हो, लेकिन कुछ लोग भरोसे या मानवीय संवाद के लिए एक ‘इंसानी अकाउंटेंट’ रखना पसंद कर सकते हैं। यानी, भविष्य की इकोनॉमी केवल ‘मानवीय पसंद’ (Human Choice) पर टिकी होगी, न कि योग्यता या कार्यक्षमता पर।
डॉ. रोमन याम्पोल्स्की की यह रिपोर्ट भविष्य की एक डरावनी तस्वीर पेश करती है। यदि उनकी भविष्यवाणी सच साबित होती है, तो सरकारों को ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’ जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना होगा। एआई का विकास हमारी मदद के लिए हुआ था, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या यह हमें ही अप्रासंगिक बना देगा? अगले पांच साल मानव इतिहास के सबसे क्रांतिकारी और चुनौतीपूर्ण वर्ष होने वाले हैं।
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